आखिर क्या है Sleep Divorce? क्यों कपल्स नहीं सो रहे एक बेड पर, यहां जाने इस ट्रेंड से जुड़ी हर एक डिटेल

What is Sleep Divorce: शादी के बाद अक्सर कपल एक साथ सोता है. ये तो हर किसी ने सुना होगा कि एक साथ सोने से प्यार बढ़ता है. लेकिन क्या आपने कभी ये सुना है कि अपने पार्टनर के बगल में सोने से आपकी नींद खराब हो सकती है. आज हम आपको ऐसा ही कुछ बताने वाले हैं.

Published by Heena Khan

Sleep Divorce: शादी के बाद अक्सर कपल एक साथ सोता है. ये तो हर किसी ने सुना होगा कि एक साथ सोने से प्यार बढ़ता है. लेकिन क्या आपने कभी ये सुना है कि अपने पार्टनर के बगल में सोने से आपकी नींद खराब हो सकती है. आज हम आपको ऐसा ही कुछ बताने वाले हैं. जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे. दरअसल, यूरोप के कुछ हिस्सों में, “स्लीप डिवोर्स” नाम का एक ट्रेंड काफी पॉपुलर हो रहा है, जिसमें कपल्स अपनी नींद की क्वालिटी सुधारने के लिए अलग-अलग सोने का तरीका अपना रहे हैं. लेकिन, ताइवान की रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस ट्रेंड का आपके रिश्ते पर बुरा असर पड़ सकता है. चलिए जान लेते हैं कि ये स्लीप डाइवोर्स क्या है और आज कल के कपल्स इसे क्यों अपना रहे हैं. 

क्या है स्लीप डिवोर्स

स्लीप डिवोर्स का मतलब है कि कपल रात में अलग-अलग बेड या अलग-अलग कमरों में सोते हैं ताकि उनकी नींद खराब न हो. इससे कपल को खर्राटे, देर रात तक जागने या अलग-अलग हेल्थ प्रॉब्लम जैसी दिक्कतों से बचने में मदद मिलती है. हालांकि, कई स्टडीज़ बताती हैं कि यह ट्रेंड कपल के रिश्ते के लिए अच्छा नहीं है, क्योंकि इससे उनका इमोशनल रिश्ता कमजोर हो सकता है.

क्या सच में लाभदायक है ये ट्रेंड

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ यूरोपीय देशों में, “स्लीप डिवोर्स” का चलन तेज़ी से चलता आ रहा है. वहीं स्वीडन और नॉर्वे जैसे नॉर्डिक देशों में लोग बेहतर और ज़्यादा आरामदायक नींद के लिए इसे अपना रहे हैं. यह ट्रेंड अपने पार्टनर से अलग सोने के फायदों पर आधारित है, कभी-कभी तो अलग-अलग कमरों में भी. स्कैंडिनेविया की इस स्लीप प्रैक्टिस ने कपल्स के अलग सोने के कॉन्सेप्ट को पॉपुलर बनाया है. हालांकि, ताइवान के रिसर्चर्स की एक नई स्टडी से पता चलता है कि अपने पार्टनर से अलग सोने से दोनों पार्टनर्स की मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है.

क्यों हो रहा ये ट्रेंड आम

इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

नींद की बेहतर क्वालिटी  बहुत से लोग खर्राटों, सोने की अलग-अलग आदतों, या पार्टनर के करवट बदलने से परेशान रहते हैं.

सेहत से जुड़े कारण  अगर किसी को नींद में चलने, रेस्टलेस लेग सिंड्रोम, या दूसरी मेडिकल समस्याएं हैं, तो अलग सोना बेहतर हो सकता है.

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अलग-अलग काम का शेड्यूल  अगर पति-पत्नी के काम के घंटे अलग-अलग हैं (उदाहरण के लिए, एक रात की शिफ्ट में काम करता है और दूसरा दिन में), तो साथ सोना मुश्किल हो सकता है.

पर्सनल स्पेस की ज़रूरत  कुछ लोग अपनी पर्सनल स्पेस और आराम को ज़्यादा अहमियत देते हैं.

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क्या यह रिश्ते के लिए अच्छा है?

कुछ लोगों के लिए, यह रिश्ता बचाने का एक तरीका हो सकता है, क्योंकि बेहतर नींद से मूड और ओवरऑल हेल्थ बेहतर होती है. दूसरों के लिए, इससे दूरी बढ़ सकती है, खासकर अगर यह इमोशनल दूरी का संकेत देता है.

भारत में भी छाया नया ट्रेंड

भारतीय समाज में जॉइंट फैमिली सिस्टम और पारंपरिक शादी की प्रथाओं के कारण, यह ट्रेंड अभी तक ज़्यादा देखने को नहीं मिलता है, लेकिन शहरी लाइफस्टाइल और बदलते सामाजिक मूल्यों के कारण यह धीरे-धीरे स्वीकार किया जा रहा है.

आखिर क्यों कपल हो रहे इस ट्रेंड के दीवाने

स्टडी रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत सहित दुनिया के कई देशों में बड़ी आबादी नींद की समस्याओं से जूझ रही है. स्वस्थ शरीर के लिए रात में कम से कम सात से नौ घंटे की अच्छी, बिना रुकावट वाली नींद ज़रूरी है. यही वजह है कि अमेरिका में बड़ी संख्या में लोग अपनी रात की नींद को बेहतर बनाने के लिए “स्लीप डिवोर्स” का विकल्प चुन रहे हैं.

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