Sleep Crisis India: देश में बढ़ा स्लीप क्राइसिस… मुंबई, कोलकाता देर से सो रहे तो दिल्ली बनी लेट-राइजर

Sleep Crisis India: वेकफिट की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के बड़े शहरों में नींद की समस्या तेजी से बढ़ रही है. बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता स्क्रीन टाइम और काम का दबाव लोगों की नींद छीन रहा है. मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में लोग देर रात तक जाग रहे हैं, जबकि दिल्ली में सबसे ज्यादा लोग देर से उठते हैं.

Published by Ranjana Sharma

Sleep Crisis India: एक समय था जब बचपन में सिखाया जाता था कि जल्दी सोना और सुबह जल्दी जागना दिमाग व शरीर के लिए अच्छा होता है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और थकाने वाली दिनचर्या ने युवाओं की नींद हराम कर दी है. आज अगर आप 10 लोगों से बात करें तो 8 लोग यही कहते मिलेंगे कि वो रात में ठीक से सो नहीं पाए. अब यही तस्वीर पूरे देश की बन चुकी है-आधी से ज्यादा आबादी नींद की कमी से जूझ रही है और इसकी सबसे बड़ी वजह तेजी से बदलती लाइफस्टाइल बन गई है.

क्या कहती है वेकफिट रिपोर्ट

वेकफिट की रिपोर्ट में दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, गुरुग्राम और कोलकाता जैसे शहरों के लोगों की नींद से जुड़ी आदतों का विश्लेषण किया गया. इसमें सामने आया कि शहरी भारत में नींद का पैटर्न तेजी से बिगड़ रहा है और लोग लगातार कम सो रहे हैं. तेजी से बदलती जीवनशैली ने लोगों की नींद छीन ली है. देर रात तक काम, अनियमित रूटीन और बढ़ता तनाव लोगों को समय पर सोने नहीं दे रहा. अब अधिकांश लोग 7-8 घंटे की बजाय केवल 5-6 घंटे ही सो पा रहे हैं, जिससे शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता.

स्वास्थ्य पर खतरा, बढ़ रहीं बीमारियां

नींद की कमी अब गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही है. इससे ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है. साथ ही दिल की बीमारी, मोटापा, डायबिटीज, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

शहरों की सच्चाई, कौन कितना सो रहा है

रिपोर्ट के अनुसार चेन्नई सबसे अनुशासित शहर है, जहां लोग समय पर सोते और जागते हैं. हैदराबाद में नींद का पैटर्न संतुलित पाया गया, जबकि गुरुग्राम के लोग व्यस्त जीवन के बावजूद नींद मैनेज कर रहे हैं. वहीं बेंगलुरु में लोग सोते तो हैं, लेकिन नींद की क्वालिटी खराब है. दिल्ली में सबसे ज्यादा लोग देर से उठते हैं, कोलकाता में लेट-नाइट कल्चर हावी है, जबकि मुंबई के लोग सबसे ज्यादा नींद की कमी से जूझ रहे हैं.

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स्क्रीन टाइम बना नींद का सबसे बड़ा दुश्मन

रिपोर्ट के मुताबिक करीब 87 प्रतिशत लोग सोने से पहले मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं. सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वेब सीरीज देखना और लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहना नींद की क्वालिटी को खराब कर रहा है और लोगों की नींद को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है.

काम पर असर

नींद की कमी का असर अब ऑफिस में भी दिख रहा है. करीब 57.8 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्हें काम के दौरान नींद आती है. खासकर दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में यह समस्या ज्यादा गंभीर है.

कंप्रेस्ड स्लीप साइकिल बनी नई चिंता

आजकल “कंप्रेस्ड स्लीप साइकिल” का ट्रेंड बढ़ रहा है, जिसमें लोग देर रात सोते हैं और काम के कारण सुबह जल्दी उठ जाते हैं. करीब 60 प्रतिशत लोग 11 बजे के बाद सोते हैं, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती और थकान बनी रहती है.

देशभर में गहराता संकट

एक बड़े सर्वे में सामने आया है कि देश के 46 प्रतिशत लोग पिछले 12 महीनों में 6 घंटे से कम सोए हैं. यह आंकड़ा बताता है कि भारत में नींद की समस्या अब एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप लेती जा रही है.

Ranjana Sharma
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