Screen Bribing: आजकल छोटे बच्चों को चुप कराने के लिए मोबाइल या टैबलेट देना एक आम आदत बनती जा रही है. रेस्टोरेंट, ट्रेन, घर या डॉक्टर के क्लिनिक-लगभग हर जगह यही दृश्य देखने को मिलता है कि बच्चा मोबाइल स्क्रीन में खोया हुआ है और माता-पिता को कुछ समय की राहत मिल जाती है. बच्चे के रोने, जिद करने या खाना न खाने की स्थिति में फोन थमा देना कई अभिभावकों के लिए सबसे आसान तरीका बन गया है. लेकिन डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चों की यह खामोशी उतनी सुरक्षित नहीं है, जितनी दिखाई देती है. उनका कहना है कि बच्चों को बार-बार स्क्रीन देकर शांत कराने की आदत लंबे समय में उनके मानसिक विकास, व्यवहार और भावनाओं पर असर डाल सकती है.
‘स्क्रीन ब्राइबिंग’ क्या है?
आजकल कई माता-पिता बच्चों को खाना खिलाने, सुलाने या बाहर ले जाते समय मोबाइल या टैबलेट दे देते हैं. स्क्रीन देखते ही बच्चा शांत हो जाता है और माता-पिता को थोड़ी राहत मिल जाती है. एक्सपर्ट्स इस आदत को ‘स्क्रीन ब्राइबिंग’ कहते हैं. यानी बच्चे को चुप कराने या संभालने के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल करना. शुरुआत में यह तरीका आसान लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह बच्चों की आदत बन जाती है और उनके स्वास्थ्य व विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती है.
ज्यादा स्क्रीन टाइम से हो सकती हैं ये समस्याएं
बच्चों के डॉक्टरों के मुताबिक अगर बच्चा लंबे समय तक मोबाइल या टैबलेट देखता है तो कई तरह की परेशानियां सामने आ सकती हैं.
- नींद से जुड़ी समस्याएं
- बोलने में देरी
- ध्यान जल्दी भटकना
- चिड़चिड़ापन बढ़ना
- अकेले रहना पसंद करना
- लोगों से बातचीत में कमी
डॉक्टर बताते हैं कि ये समस्याएं धीरे-धीरे बढ़ती हैं, इसलिए कई बार माता-पिता समय रहते इसे गंभीरता से नहीं लेते.
बचपन में दिमाग के विकास पर असर
बचपन वह समय होता है जब बच्चे का दिमाग बहुत तेजी से विकसित होता है. इस दौरान बच्चों को बातचीत, खेल, सवाल-जवाब और भावनात्मक जुड़ाव की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. जब बच्चा ज्यादा समय स्क्रीन पर बिताता है तो वह अपने आसपास की दुनिया से धीरे-धीरे कटने लगता है. वह कम बोलता है, कम सुनता है और लोगों की भावनाओं को समझने में भी पीछे रह सकता है. स्क्रीन उसे कुछ समय के लिए व्यस्त जरूर रखती है, लेकिन सीखने और सामाजिक जुड़ाव के कई मौके छीन लेती है.
माता-पिता क्यों देते हैं बच्चों को मोबाइल?
ज्यादातर माता-पिता जानते हैं कि ज्यादा मोबाइल बच्चों के लिए सही नहीं है, फिर भी वे ऐसा करते हैं. इसके पीछे थकान, काम का दबाव और समय की कमी जैसी वजहें होती हैं. आजकल कई परिवारों में दोनों माता-पिता कामकाजी होते हैं. ऐसे में बच्चे को संभालने के लिए मोबाइल सबसे आसान सहारा बन जाता है. धीरे-धीरे यही सहारा आदत में बदल जाता है और बच्चा बिना स्क्रीन के रहना मुश्किल समझने लगता है.
बच्चों को चाहिए समय और ध्यान
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरत स्क्रीन की नहीं, बल्कि माता-पिता के समय और ध्यान की होती है. बच्चों को मोबाइल देने के बजाय उनसे बातचीत करना, कहानियां सुनाना और उनके साथ खेलना ज्यादा फायदेमंद होता है. अगर बच्चा ऊब रहा है तो उसे घर के छोटे-छोटे कामों में शामिल किया जा सकता है. इस तरह बच्चों का स्क्रीन टाइम धीरे-धीरे कम किया जा सकता है और उनके मानसिक व भावनात्मक विकास को बेहतर बनाया जा सकता है.

