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Jharkhand: विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग का गठन, झामुमो ने बताया ऐतिहासिक फैसला

Jharkhand: झारखंड में विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग का गठन, झामुमो ने बताया ऐतिहासिक फैसला, सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज पार्टी कार्यालय में  किया प्रेस वार्ता

Published by Swarnim Suprakash

रांची, झारखण्ड से मनीष मेहता की रिपोर्ट की रिपोर्ट 
Jharkhand: मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य सरकार ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए झारखंड राज्य विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष झामुमो ने इसे ऐतिहासिक करार दिया है।

सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज पार्टी कार्यालय में  किया प्रेस वार्ता

झामुमो के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता में कहा कि विस्थापन झारखंड की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक रही है। यहां की जमीन और संसाधनों पर बड़े प्रोजेक्ट्स तो आए, लेकिन स्थानीय लोगों को सिर्फ उजड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि विस्थापितों के हितों की अनदेखी अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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शिबू सोरेन के आंदोलन का जिक्र

भट्टाचार्य ने कहा कि विस्थापन के खिलाफ गुरुजी शिबू सोरेन ने कई आंदोलन किए। वर्ष 2001 में जब एनएचपीसी का कोयला कारों परियोजना आई थी, तब विस्थापितों ने इसका जोरदार विरोध किया था। उस वक्त आंदोलन इतना उग्र हुआ कि गोली तक चली थी। बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में राज्य सरकार उस समय इस परियोजना को आगे बढ़ा रही थी। लेकिन गुरुजी शिबू सोरेन ने जब यह मुद्दा विधानसभा में उठाया तो परियोजना पर रोक लगा दी गई। उन्होंने कहा, “विकास विनाश के रास्ते से नहीं हो सकता। विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें लोगों का जीवन सुरक्षित और सम्मानजनक हो।”

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झामुमो ने फैसले को बताया दूरदर्शी कदम

झामुमो प्रवक्ता ने कहा कि आयोग के गठन से विस्थापन की समस्याओं का सुनियोजित समाधान निकल सकेगा। अब हर परियोजना के साथ पुनर्वास और आजीविका की स्पष्ट योजना बनेगी। इससे जहां विकास कार्य गति पकड़ेंगे वहीं स्थानीय समुदायों का हक भी सुरक्षित रहेगा।

विपक्ष पर निशाना

भट्टाचार्य ने विपक्ष पर भी हमला बोला, उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने विकास के नाम पर लोगों को उजाड़ने का काम किया। कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं और विस्थापित परिवार दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर हुए। लेकिन वर्तमान सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अब बिना पुनर्वास योजना के कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट मंजूर नहीं होगा। झामुमो का कहना है कि आयोग का गठन राज्य के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होगा और इससे विकास और जनहित के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।

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