Supreme Court Muslim Judge: देश की शीर्ष अदालत में सीजेआई को मिलाकर कुल जजों की संख्या 34 है. इन न्यायाधीशों पर देश भर में न्याय की अंतिम ज़िम्मेदारी होती है, क्योंकि जब किसी व्यक्ति को निचली अदालतों या उच्च न्यायालयों से न्याय नहीं मिलता है, तो सर्वोच्च न्यायालय ही उसकी आखिरी उम्मीद होता है.
लेकिन क्या आपको इस बारे में जानकारी है कि इन 34 जजों में मुस्लिम जजों की संख्या कितनी है. अगर नहीं है तो हम आपको बता दें कि बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में मात्र एक मुस्लिम जज हैं. जिनका नाम जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह (Justice Ahsanuddin Amanullah) है. वह वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत हैं और उनकी नियुक्ति 6 फरवरी, 2023 को हुई थी.
जस्टिस अमानुल्लाह शिक्षा पर एक नजर
जस्टिस अमानुल्लाह का जन्म 11 मई, 1963 को हुआ था. अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने कानून की पढ़ाई की और 27 सितंबर, 1991 को बिहार राज्य बार काउंसिल में दाखिला लिया. इसके बाद उन्होंने पटना उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की और जल्द ही एक योग्य अधिवक्ता के रूप में अपनी पहचान बना ली.
उनका कानूनी करियर
उन्होंने न केवल पटना उच्च न्यायालय में, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय और देश भर के विभिन्न उच्च न्यायालयों में भी वकालत की है. संवैधानिक, दीवानी, फौजदारी, सेवा, सहकारिता, कराधान, श्रम और कॉर्पोरेट मामलों में उनके पास व्यापक अनुभव और विशेषज्ञता है. वे विशेष रूप से संवैधानिक और सेवा कानून पर अपनी गहरी पकड़ के लिए जाने जाते हैं.
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जस्टिस अमानुल्लाह का न्यायिक सफर
न्यायमूर्ति अमानुल्लाह को 20 जून, 2011 को पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था. इसके बाद 10 अक्टूबर, 2021 को उनका आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में स्थानांतरण हो गया. कुछ समय वहां पर सेवा देने के बाद, वो 20 जून, 2022 को पटना उच्च न्यायालय में लौट आए. इसके बाद उन्हें 6 फरवरी, 2023 को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया.
बता दें कि न्यायमूर्ति हसनुद्दीन अमानुल्लाह न केवल देश के सर्वोच्च न्यायालय में मुस्लिम समुदाय के एकमात्र प्रतिनिधि हैं, बल्कि अपने व्यापक कानूनी अनुभव और निष्पक्ष निर्णयों के लिए भी जाने जाते हैं.
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