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Vande Mataram Debate: लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा, जानें- पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें

Vande Mataram 150 Years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के शीतकालीन सत्र के आठवें दिन लोकसभा में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' पर चर्चा की शुरुआत की. इस दौरान उन्होंने कई बड़ी बातें कही. उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत या राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और मातृभूमि की आजादी के लिए एक पवित्र संघर्ष का प्रतीक था.

Published by Hasnain Alam

Vande Mataram Lok Sabha Discussion: संसद का शीतकालीन सत्र जारी है. सोमवार को सत्र का आठवां दिन है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा की शुरुआत की. इस गीत के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में संसद में खास चर्चा की जा रही है. पीएम मोदी ने कहा कि हमने इस महत्वपूर्ण अवसर पर एक सामूहिक चर्चा का रास्ता चुना है. जिस मंत्र और जयघोष ने देश की आजादी के आंदोलन को ऊर्जा और प्रेरणा दी थी और त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था. उस वंदे मातरम् को स्मरण करना हम लोगों का सौभाग्य है. यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हम इस पल के साक्षी बन रहे हैं.

पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें

  1. पीएम मोदी ने कहा कि यह केवल एक गीत या राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और मातृभूमि की आजादी के लिए एक पवित्र संघर्ष का प्रतीक था.
  2. उन्होंने कहा- “बंकिम दा ने जब ‘वंदे मातरम्’ की रचना की तब स्वाभाविक ही वह स्वतंत्रता आंदोलन का पर्व बन गया. तब पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण, ‘वंदे मातरम्’ हर भारतीय का संकल्प बन गया. इसलिए वंदे मातरम् की स्तुति में लिखा गया था कि मातृभूमि की स्वतंत्रता की वेदी पर, मोद में स्वार्थ का बलिदान है. यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है. सजीवन मंत्र भी, विजय का विस्तृत मंत्र भी. यह शक्ति का आह्वान है. यह ‘वंदे मातरम्’ है. उष्ण शोणित से लिखो, वत्स स्थली को चीरकर वीर का अभिमान है. यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है.”
  3. पीएम मोदी ने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ उस समय लिखा गया था, जब 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश सरकार सतर्क थी और हर स्तर पर दबाव और अत्याचार की नीतियां लागू कर रही थी. उस दौर में ब्रिटिश राष्ट्रगान ‘गॉड सेव द क्वीन’ को हर घर तक पहुंचाने की मुहिम चल रही थी. ऐसे समय में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपनी लेखनी से जवाब देते हुए ‘वंदे मातरम्’ लिखा और भारतीयों में साहस और आत्मविश्वास की नई लहर पैदा की.
  4. प्रधानमंत्री ने कहा- “जब हम ‘वंदे मातरम्’ कहते हैं, तो यह हमें वैदिक युग की संस्कृति की याद दिलाता है. वेदों में कहा गया है कि माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः, अर्थात यह भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं. यही विचार भगवान राम ने भी व्यक्त किया था, जब उन्होंने कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी. आज ‘वंदे मातरम्’ इसी महान सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक रूप है.”
  5. पीएम ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् केवल अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का मंत्र नहीं था, बल्कि यह मातृभूमि की मुक्ति की पवित्र जंग का प्रतीक था. यह गीत उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के साहस और बलिदान का सम्मान करता है, जिन्होंने इसे अपने आंदोलन का हिस्सा बनाया.
  6. उन्होंने सदन में सभी सांसदों से कहा कि इस अवसर पर पक्ष-प्रतिपक्ष का कोई भेदभाव नहीं है, क्योंकि यह समय है ‘वंदे मातरम्’ के ऋण को स्वीकार करने का, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने बलिदानों से पूरा किया.
  7. उन्होंने याद दिलाया कि आज भारत में जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और आजादी है, वह इसी आंदोलन का परिणाम है.
  8. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- “संसद में बैठे सभी सांसदों के लिए यह अवसर है कि वे इस ऋण को स्वीकार करें और उस पवित्र संघर्ष को याद करें, जिसने हमारी मातृभूमि को स्वतंत्र कराया.
  9. पीएम मोदी ने वंदे मातरम् के 150 वर्षों की यात्रा को याद करते हुए कहा- “यह यात्रा अनेक पड़ावों से गुजरी है, लेकिन वंदे मातरम् 50 वर्ष पूरे हुए तो देश गुलामी में जीने के लिए मजबूत था. जब 100 साल पूरे हुए तो देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था. भारत के संविधान का गला घोंट दिया गया था. देशभक्ति के लिए जीने-मरने वाले लोगों को जेल में बंद कर दिया गया था. दुर्भाग्य से एक काला कालखंड हमारे इतिहास में उजागर हो गया.”
  10. उन्होंने कहा- “150 वर्ष उस महान अध्याय और गौरव को दोबारा स्थापित करने का अवसर है. मैं मानता हूं कि सदन और देश को इस अवसर को जाने नहीं देना चाहिए. यही वंदे मातरम् है, जिसने 1947 में देश को आजादी दिलाई.”

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