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Nithari Murder Case 2025: सुरेन्द्र कोली आएगा जेल से बाहर, 18 साल बाद भी रहस्य बरकरार, 19 लोगों का किसने किया कत्ल

सुप्रीम कोर्ट ने निठारी हत्याकांड से जुड़े एक अहम फैसले में सुरेंद्र कोली की क्यूरेटिव पिटीशन स्वीकार करते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है। 2011 के फैसले को पलटते हुए अदालत ने कहा कि कोली के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य कानूनी मानकों पर खरे नहीं उतरते.

Published by Shivani Singh

देश को झकझोर देने वाले निठारी हत्याकांड से जुड़ी एक बड़ी घटना में, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 11 नवंबर को एक अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने कोली की क्यूरेटिव पिटीशन, जो इस मामले का मूल आधार है, स्वीकार कर ली है. सुप्रीम कोर्ट ने 2011 के अपने पहले के फैसले को पलटते हुए कोली के सभी साथियों को क्षमादान देते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से कोली की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है.

कोली को अब तक केवल रिम्पा हलदर हत्याकांड में ही दोषी पाया गया था, जबकि इलाहाबाद की अदालत में उसके खिलाफ 12 अन्य मामलों में मुकदमा चल चुका था. अदालत ने फैसला सुनाया कि कोली के खिलाफ आरोप साबित नहीं हुए हैं, इसलिए उसे तुरंत रिहा किया जाना चाहिए. अदालत ने क्या कहा? कुलपति के 2011 के फैसले को पलट दिया गया.

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोली की दोषसिद्धि केवल एक घटना पर आधारित थी, जो साक्ष्य नहीं थी. अदालत ने माना कि अन्य सभी मामलों की सुनवाई के बाद, यह स्थिति “कानूनी रूप से असामान्य” हो गई.

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निठारी हत्याकांड क्या था?

निठारी हत्याकांड 2005 और 2006 के बीच हुआ था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. यह मामला दिसंबर 2006 में तब सामने आया जब निठारी ग़ांव में एक घर के पीछे के नाले में कई कंकाल बरामद हुए. जांच से पता चला कि जिस घर के पास कंकाल मिले थे, वह एक व्यवसायी मोनिंदर सिंह पंढेर का घर था और सुरेंद्र कोली वहां काम करता था. कोली पर कई बच्चों की हत्या करने का आरोप था. कोली को 15 वर्षीय लड़की का रेप और हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था. इसके बाद निचली अदालत ने साल 2011 में उसे फांसी की सजा सुनाई थी.

आपको बताते चलें कि कम से कम 19 युवतियों और बच्चों के साथ बलात्कार किया गया, उनकी हत्या की गई और उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। उस समय पुलिस ने आरोप लगाया था कि हत्याएँ पंढेर के घर के अंदर हुईं, जहाँ कोली नौकर के तौर पर काम करता था.

अदालत ने राहत क्यों दी?

7 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान, सर्वोच्च न्यायालय ने संकेत दिया कि मामले में कोली की दोषसिद्धि साक्ष्यों पर आधारित थी. अदालत ने कहा कि केवल स्वीकारोक्ति और ज़ब्ती के आधार पर मौत की सज़ा नहीं दी जा सकती. इसके आधार पर, सुप्रीम कोर्ट ने कोली की क्यूरेटिव पिटीशन स्वीकार कर ली और उसे रिहा करने का आदेश दिया. इस फ़ैसले के बाद, सुंदर कोली अब लगभग 18 साल बाद जेल से रिहा हो गया है.

Shivani Singh

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