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Middle East War Impact: मिडिल ईस्ट जंग का असर भारत तक, ‘खट्टे’ हुए अंगूर और केला दागदार, फलों-सब्जियों से भरे कंटेनर लौटे वापस

Middle East war impact: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव का असर भारत के कृषि निर्यात पर भी पड़ रहा है. समुद्री रास्तों में बाधा आने से नासिक के अंगूर और केला किसानों के सैकड़ों कंटेनर बंदरगाहों पर फंसे हैं.

Published by Ranjana Sharma

Middle East war impact: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर भी दिखने लगा है. समुद्री रास्तों में रुकावट और कई बंदरगाहों के प्रभावित होने से महाराष्ट्र के नासिक जिले के अंगूर और केला उत्पादकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. फलों से भरे सैकड़ों कंटेनर बंदरगाहों पर फंसे हैं या वापस लौट आए हैं, जिससे किसानों और निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

समुद्री व्यापार पर युद्ध का असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण पिछले 10–12 दिनों से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता के कारण जहाजों की आवाजाही धीमी हो गई है. इंडियन हॉर्टिकल्चर एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) पर 350 से ज्यादा कंटेनर फंसे हुए हैं. इनमें से कई कंटेनरों में अंगूर, केले, प्याज, तरबूज और खरबूजा जैसे जल्दी खराब होने वाले फल और सब्जियां भरी हैं.

दुबई रूट बंद होने से टूटी सप्लाई चेन

भारत से खाड़ी देशों और यूरोप के लिए फल निर्यात का बड़ा हिस्सा दुबई के रास्ते जाता है. लेकिन दुबई जैसे बड़े ट्रांसशिपमेंट हब पर रुकावट आने से पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है. कई कंटेनर जो दुबई या अन्य खाड़ी बंदरगाहों के लिए भेजे गए थे, उन्हें पोर्ट बंद होने के कारण वापस लौटा दिया गया या रास्ते में ही दूसरे बंदरगाहों की ओर मोड़ दिया गया.

नासिक के अंगूर निर्यातकों को झटका

नासिक देश का सबसे बड़ा अंगूर उत्पादक क्षेत्र माना जाता है. यहां से हर साल बड़ी मात्रा में अंगूर विदेशों में भेजे जाते हैं. लेकिन मौजूदा हालात में कई कंटेनर वापस लौट आए हैं. नासिक से दुबई भेजे गए अंगूर के चार कंटेनर वापस लौटने पड़े, जिनमें करीब 13 मीट्रिक टन अंगूर थे. इन्हें निफाड़ के कोल्ड स्टोरेज में रखना पड़ा. अंगूर जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए समय पर बाजार तक न पहुंचने पर नुकसान का खतरा बढ़ जाता है.

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केले के निर्यातकों की मुश्किल और गहरी

अंगूर के साथ-साथ केले के निर्यातकों की स्थिति भी खराब हो गई है. नासिक, सोलापुर और जलगांव से केले का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है. एक निर्यातक संदीप अग्रहरी के करीब 36 कंटेनर अलग-अलग बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं. कुछ कंटेनर JNPT पर खड़े हैं, जबकि कुछ रास्ते में ही रोक दिए गए हैं. इन कंटेनरों को वापस लाने और कोल्ड स्टोरेज में रखने में प्रति कंटेनर लगभग एक लाख रुपये तक अतिरिक्त खर्च आ रहा है.

शिपिंग कंपनियों ने बढ़ाया अतिरिक्त शुल्क

युद्ध के खतरे को देखते हुए शिपिंग कंपनियों ने अब “वॉर रिस्क सरचार्ज” या “इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज” लागू कर दिया है. इस अतिरिक्त शुल्क के तहत 20 फुट कंटेनर पर करीब 2000 डॉलर, 40 फुट कंटेनर पर 3000 डॉलर और रीफर कंटेनर पर करीब 4000 डॉलर तक अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है. इससे निर्यात की लागत अचानक काफी बढ़ गई है.

फलों के दाम गिरे, किसानों को दोहरा झटका

निर्यात रुकने से घरेलू बाजार में फलों की आपूर्ति बढ़ गई है, जिससे कीमतों में गिरावट आने लगी है. उदाहरण के तौर पर केले का निर्यात मूल्य पहले करीब 21 रुपये प्रति किलो था, जो अब घटकर लगभग 13 रुपये प्रति किलो रह गया है. इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है.

पहले बारिश का नुकसान, अब युद्ध की मार

नासिक के किसान पहले ही बेमौसम बारिश की वजह से नुकसान झेल चुके हैं. पिछले साल यहां अंगूर का उत्पादन लगभग 60 से 70 प्रतिशत तक कम हो गया था. किसान अभी उस नुकसान से उबरने की कोशिश कर ही रहे थे कि अब अंतरराष्ट्रीय तनाव और शिपिंग संकट ने नई परेशानी खड़ी कर दी है. मौजूदा हालात जारी रहे तो करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है.

Ranjana Sharma
Published by Ranjana Sharma

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