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Marathi Language Controversy: ‘पहले मराठी सिखाओ, अगर अकड़ दिखाएं…’, मनसे कार्यकर्ताओं से ये क्या बोल गए राज ठाकरे, गुंडागर्दी करने की दी खुली छूट!

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि सबसे पहले लोगों को पीटा नहीं जाना चाहिए, उन्हें समझाया जाना चाहिए। अगर वे अकड़ दिखाते हैं तो फिर जैसा रवैया अपनाया जाता रहा है वैसा ही अख्तियार करना है।

Published by Ashish Rai

Marathi Language Controversy: महाराष्ट्र में आगामी बीएमसी और स्थानीय निकाय चुनाव नज़दीक आ रहे हैं। राजनीतिक दल इसे लेकर रणनीति बनाने में जुटे हैं। इस बीच, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) एक अलग ही रंग में नज़र आ रही है। वह मराठी भाषा का झंडा बुलंद कर रही है, जिससे सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सोमवार को अपने पदाधिकारियों की बैठक बुलाई और कार्यकर्ताओं को मराठी भाषा को लेकर सीधा संदेश दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि सबसे पहले लोगों को पीटा नहीं जाना चाहिए, उन्हें समझाया जाना चाहिए। अगर वे अकड़ दिखाते हैं तो फिर जैसा रवैया अपनाया जाता रहा है वैसा ही अख्तियार करना है। 

उद्धव ठाकरे के साथ आने को लेकर राज ठाकरे ने कहा, ‘अगर हम दोनों भाई बीस साल बाद साथ आ सकते हैं, तो आप आपस में क्यों लड़ रहे हैं? कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच कोई विवाद रखने के बजाय, चुनाव की तैयारी शुरू कर दीजिए। हमारी पार्टी मुंबई में सबसे मज़बूत है। इस बार मुंबई नगर निगम की सत्ता हमारे हाथ में आएगी। किसके साथ गठबंधन करना है, यह मुझ पर छोड़ दीजिए। सही समय पर उचित निर्देश दिए जाएँगे।

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‘वीडियो न बनाएँ’

मराठी मुद्दे पर राज ठाकरे ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया, ‘बिना वजह किसी को पीटें नहीं, पहले समझाएँ। अगर वे मराठी सीखने और बोलने को तैयार हैं, तो उन्हें सिखाएँ, लेकिन अगर वे अहंकार दिखाएँ, तो भविष्य में भी यही रवैया अपनाएँ। वीडियो न बनाएँ।’ इसके अलावा, उन्होंने कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची पर विशेष रूप से काम करने और जाँच शुरू करने के निर्देश दिए। चुनावी तैयारियों के तहत पुराने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को साथ लेकर आगे बढ़ें।

गुटबाजी के आगे न झुकें – राज ठाकरे

राज ठाकरे ने कार्यकर्ताओं को स्थानीय समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने और जमीनी स्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि बिना किसी दबाव में आए पूरे आत्मविश्वास के साथ काम करें। पार्टी की आंतरिक ईर्ष्या और गुटबाजी के आगे न झुकें। नए पदाधिकारियों की नियुक्ति का स्वागत करें और मिलकर काम करें। आपसी ईर्ष्या को दूर करें।

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