India-America Relation: अमेरिका और भारत के बीच अब सब कुछ पहले से काफी बेहतर है. ऐसा इसलिए क्योंकी अमेरिका ने भारत को एक बड़ी राहत दे दी है. भारत और अमेरिका के बीच कई महीनों से चल रही बातचीत के बाद ट्रेड डील पर सहमति बन गई है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत के बाद इस बड़े ट्रेड एग्रीमेंट की घोषणा की. इस समझौते के मुताबिक, अमेरिका ने भारत पर कुल टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है. साथ ही उम्मीद जताई जा रही है कि इस फैसले से भारतीय कारोबारियों को काफी राहत मिलने वाली है और इन दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत होने वाला है.
अमेरिका का मुख्य फैसला
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अब भारत पर सिर्फ 18% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया जाएगा. पहले, अमेरिका ने भारत पर 25% का बेस टैरिफ लगाया था और अगस्त 2025 में रूसी तेल आयात से जुड़े कथित उल्लंघनों के लिए 25% की अतिरिक्त पेनल्टी लगाई थी. इससे भारत पर कुल टैरिफ 50% हो गया था. अब, व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने साफ किया है कि रूस से तेल खरीदने से जुड़ा अतिरिक्त 25% टैरिफ पूरी तरह से हटा दिया जाएगा.
भारत को किस-किस सेक्टर में होगा फयदा
अमेरिका से खरीदेगा कच्चा तेल
खास बात ये है कि अब भारत अपने कच्चे तेल का ज्यादातर हिस्सा अमेरिका से खरीदेगा. वेनेजुएला से तेल आयात को लेकर भी समझौता हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने में मदद मिलेगी और वैश्विक शांति में योगदान मिलेगा.
$500 बिलियन का लक्ष्य
साथ ही बता दें डील में ये भी तय हुआ है कि, भारत ‘बाय अमेरिकन’ पॉलिसी के तहत अमेरिका से $500 बिलियन से ज़्यादा का सामान खरीदेगा. इसमें एनर्जी, टेक्नोलॉजी, कृषि उत्पाद, कोयला और अन्य इंडस्ट्री शामिल हैं. बिग बूस्ट ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बूस्ट बताया है
इन सेक्टर्स को भी फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय गारमेंट, रत्न और आभूषण, कालीन, झींगा और होम टेक्सटाइल सेक्टर को सीधा फायदा होगा. अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान को अब मुख्य रूप से चीन और बांग्लादेश से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा.
भारत की ज़रूरतें
भारत को अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का लगभग 96% आयात करना पड़ता है. दिसंबर 2023 में, भारत का कच्चे तेल का उत्पादन लगभग 544,000 बैरल प्रति दिन था. ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने के लिए, तेल उद्योग भारत की मांग को पूरा करने के लिए अमेरिका और वेनेजुएला जैसे देशों से आयात पर विचार कर रहा है.

