Categories: देश

Garudan Parava: मांस में हुक, हवा में उड़ान…भद्रकाली को समर्पित गरुडन परवा की रहस्यमयी परंपरा; यहां जानें इसके बारे में

Ancient Indian Rituals: गरुडन परवा को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि यह केवल नृत्य या शारीरिक कष्ट नहीं, बल्कि देवी के प्रति कृतज्ञता का चरम रूप है, जहां भक्त गरुड़ के रूप में स्वयं को देवी के सामने समर्पित करते हैं.

Published by Shubahm Srivastava

Garudan Parava: गरुडन परवा दक्षिण भारत, खासकर केरल में निभाई जाने वाली एक चमत्कारी और विस्मयकारी लोक-परंपरा है, जो देवी भद्रकाली की आस्था और गरुड़ पौराणिक कथा से जुड़ी है. हालांकि यह परंपरा बाहरी लोगों को अत्यंत विचित्र और कभी-कभी भयावह लग सकती है, लेकिन स्थानीय समुदायों के लिए यह गहरी धार्मिक श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता का जीवित प्रतीक है. गरुडन परवा को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि यह केवल नृत्य या शारीरिक कष्ट नहीं, बल्कि देवी के प्रति कृतज्ञता का चरम रूप है, जहां भक्त गरुड़ के रूप में स्वयं को देवी के सामने समर्पित करते हैं.

देवी भद्रकाली के दारिका असुर के साथ भीषण युद्ध से जुड़ी है परंपरा

किंवदंती के अनुसार यह परंपरा देवी भद्रकाली के दारिका असुर के साथ भीषण युद्ध से जुड़ी है. वरदान प्राप्त दारिका ने देवलोक और पृथ्वी को आतंकित कर दिया था, जिसके अंत के लिए शिव से उत्पन्न भद्रकाली युद्धभूमि में उतरीं. किंतु दारिका ने मायाजाल और नागों की रचना कर देवी के सामने नई चुनौती प्रस्तुत की. तभी गरुड़, सर्पों के प्राकृतिक विरोधी, देवी की सहायता के लिए आए और उन्होंने नागों की मायावी सेना को नष्ट किया. युद्ध में सफलता मिलने पर देवी ने गरुड़ को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मनुष्य उसके प्रति धन्यवाद व्यक्त करने के लिए गरुड़ बनकर उनकी सेवा कर सकते हैं. आज गरुडन परवा इसी कृतज्ञता और दिव्य सहायता के पुनर्स्मरण का भौतिक रूप है.

आज भी इन मंदिरों में निभाई जाती है ये परंपरा

केरल के कुछ चुनिंदा मंदिरों — विशेषकर अलप्पुझा, कोट्टायम, थ्रिशूर और पठानमथिट्टा जिले — में यह परंपरा आज भी निभाई जाती है. इस अनुष्ठान की शुरुआत एक संकल्प या व्रत से होती है, जहां भक्त कुछ दिनों तक संयम, शुचिता और कभी-कभी ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं. यह माना जाता है कि गरुड़ की भूमिका निभाने से पहले शरीर और मन का पवित्र होना आवश्यक है. अभ्यास और तैयारियों के बाद प्रदर्शनकर्ता अपने शरीर को कई घंटों तक चलने वाले रंग, पाउडर और मेकअप से सजाते हैं. चमकीले रंग, पंख, आभूषण, मुखौटा या चोंच जैसे चेहरे के आकार कलाकारों को मानव से पक्षी रूप में बदलते हैं — यह परिवर्तन अनुष्ठान का मूल विचार है.

रात की तीव्र ढोल-नगाड़ों की ताल पर नृत्य शुरू होता है. जैसे-जैसे चेंडा, घंटियाँ और शंख की लय तेज़ होती जाती है, कलाकार स्वयं को केवल नृत्य नहीं, बल्कि गरुड़ के रूप में आकाश में उड़ते महसूस करते हैं. इस दौरान कई कलाकार तंद्रा (ट्रांस) जैसी अवस्था में प्रवेश कर जाते हैं, जिसे स्थानीय समुदाय देवी का आश्रय और गरुड़ की आत्मा का आवाहन मानते हैं. दर्शकों और भक्तों के लिए यह क्षण अत्यंत भावनात्मक और पवित्र होता है.

बाहरी दुनिया की नज़र में क्यों विचित्र है ये परंपरा?

फिर वह क्षण आता है जो इस परंपरा को बाहरी दुनिया की नज़र में “विचित्र” बनाता है — प्रशिक्षित पुरोहित और सहायक, पूर्ण मंत्रोच्चार और रस्मों के बीच कलाकार की पीठ या जांघ की त्वचा में धातु के विशेष हुक लगाते हैं. यह क्रिया दर्द की परीक्षा मात्र नहीं है, बल्कि शरीर को देवी भद्रकाली को समर्पित करने का प्रतीकात्मक रूप है. कुछ मंदिरों में यह परंपरा अब सुरक्षित या प्रतीकात्मक रूप में निभाई जाती है, जबकि कुछ स्थानों पर आज भी पूरी गंभीरता और शास्त्रीय रूप में यही प्रक्रिया निभाई जाती है.

Related Post

हुक लगाए जाने के बाद कलाकार को एक लंबे दंड से बांधा जाता है, जो अक्सर रथ पर लगा होता है या घूमने वाले खंभे से जुड़ा होता है. जैसे ही दंड को उठाया जाता है, कलाकार हवा में “उड़ता” दिखाई देता है — बिना किसी सहारे, केवल दो-चार हुकों के सहारे शरीर जमीन से ऊपर. ड्रम और मंत्रों की लय में, यह उड़ान गरुड़ की आसमान चीरने वाली गति और देवी के प्रति धन्यवाद का चरम दृश्य मानी जाती है. यह दृश्य दर्शकों के लिए विस्मयकारी होता है, लेकिन भक्तों के लिए यह देवी के प्रति पूर्ण समर्पण का क्षण होता है.

समारोह समाप्त होने पर कलाकार को धीरे-धीरे उतारा जाता है और हुक हटाकर घावों पर औषधीय जड़ीबूटियाँ लगाई जाती हैं. आश्चर्यजनक बात यह है कि अधिकांश कलाकार वर्षों तक यह अनुष्ठान बार-बार करते हैं, मानते हुए कि वह देवी की कृपा, संकल्प की पूर्ति और समुदाय के आशीर्वाद से संरक्षित हैं.

गरुडन परवा का अर्थ

गरुडन परवा का अर्थ केवल एक प्राचीन रिवाज़ नहीं है. यह एक जीवंत सामाजिक और सांस्कृतिक ताना-बाना है जो आध्यात्मिकता, नाटक, लोककला, शौर्य और सामुदायिक पहचान, सबको एकसाथ जोड़े रखता है. यह परंपरा दिखाती है कि कैसे भारत की हजारों साल पुरानी भक्ति-पद्धतियाँ आज भी लोगों के जीवन में अद्भुत अर्थ और प्रेरणा पैदा करती हैं. आधुनिक समय की संवेदनशीलता और नैतिक प्रश्नों ने इस रिवाज़ को चुनौती दी है, लेकिन कई मंदिरों ने इसे बदलकर नये रूप में अपनाया है — जैसे हुक के बिना झूलना, प्रतीकात्मक उड़ान, या सिर्फ़ नृत्य का रूप रखना.

फिर भी एक बात नहीं बदली — देवी भद्रकाली के प्रति वह अटूट आस्था, जिसकी आग हजारों वर्षों से बुझी नहीं है. गरुडन परवा याद दिलाता है कि लोक-परंपराएँ केवल इतिहास नहीं होतीं; वे जीवित अनुभव हैं, जिनमें लोग आज भी स्वयं को देवी, मिथक और समुदाय से जोड़ते हैं. और जब भी गरुड़ का रूप धारण किए भक्त हवा में उठते हैं, यह संदेश फिर जीवित होता है — आस्था पर्वतों को हिला सकती है, और कभी-कभी शरीर को भी आकाश में उड़ने की शक्ति दे देती है.

Shubahm Srivastava

Recent Posts

48 घंटे के अंदर कैंसिलेशन पर पूरा पैसा वापस, DGCA ने बदले नियम; अब नाम की गलती फ्री में होगी ठीक

DGCA: अब अगर फ़्लाइट टिकट बुक करने के बाद कोई गलती हो जाए तो घबराने…

February 26, 2026

बंदे ने फोन दिला दिया…बेंगलुरु महिला की पोस्ट ने सोशल मीडिया पर छेड़ी जेंडर सोच पर बहस

Women buying iPhones: अनु जिसने एक्स पर एक घटना के बारे में पोस्ट किया था,…

February 26, 2026

AI Course After 12th: 12वीं बोर्ड के बाद AI में करियर बनाना है? जानिए टॉप 5 कोर्स, जो दिला सकते हैं शानदार कमाई

AI Course After 12th: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज की डिजिटल दुनिया में सबसे तेज़ी से…

February 26, 2026

India Semi-Final Qualification Scenario: सिर्फ जीत नहीं, बड़ी जीत जरूरी! जानिए भारत का नेट रन रेट गणित

India Qualification Scenario: जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में भारत का मकसद केवल दो अंक हासिल…

February 26, 2026

Holika Dahan 2026 Kab hai: होलिका दहन के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां,जानिए शुभ मुहूर्त और सही पूजन विधि

Holika Dahan 2026 Kab hai: पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा 03 मार्च 2026 को पड़ेगी…

February 26, 2026

Credit Card Rules: क्या क्रेडिट कार्ड बिल न भरने पर हो सकती है जेल; जानिए क्या कहता है कानून?

Credit Card News: सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि क्रेडिट कार्ड का बिल समय…

February 26, 2026