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AAP internal conflict: आप में अंदरूनी कलह, आतिशी बोलीं- मोदी की गोद में बैठे हैं राघव चड्ढा, पंजाब CM भगवंत मान ने भी घेरा

AAP internal conflict: आम आदमी पार्टी और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया है. डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद राघव के बयान पर पार्टी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें मुद्दों से भटका और “कम्प्रोमाइज्ड” बताया, जबकि आतिशी ने आरोप लगाया कि वे पीएम मोदी के खिलाफ बोलने से बचते हैं.

By: Ranjana Sharma | Published: April 3, 2026 5:27:45 PM IST



AAP internal conflict: आम आदमी पार्टी के भीतर इन दिनों सियासी घमासान खुलकर सामने आ गया है. राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद पार्टी और उसके ही एक प्रमुख सांसद के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि मतभेद अब अंदरूनी न रहकर सार्वजनिक हो चुके हैं.

ऐसे  शुरू हुआ विवाद

पार्टी द्वारा राज्यसभा में नेतृत्व में बदलाव के फैसले को जहां आधिकारिक तौर पर एक सामान्य प्रक्रिया बताया जा रहा है, वहीं इस फैसले के बाद सामने आए बयान कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. पद से हटाए जाने के बाद संबंधित सांसद ने वीडियो जारी कर अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए, जिसके बाद यह मामला तूल पकड़ गया. पार्टी के भीतर इसे अनुशासन और लाइन से भटकने के संदर्भ में देखा जा रहा है.

भगवंत मान का तीखा हमला

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान  ने इस पूरे विवाद पर खुलकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि पार्टी में जिम्मेदारियां समय-समय पर बदलती रहती हैं, लेकिन सांसदों से अपेक्षा होती है कि वे अहम मुद्दों पर पार्टी की लाइन के साथ खड़े रहें. उन्होंने आरोप लगाया कि कई गंभीर मामलों पर आवाज उठाने की बजाय हल्के मुद्दों को प्राथमिकता दी गई, जो पार्टी की नीति के खिलाफ है. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा व्यवहार “कम्प्रोमाइज्ड” होने का संकेत देता है.

आतिशी का बड़ा आरोप

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने कहा है कि राघव चड्ढा पीएम मोदी की गोद में बैठे हैं, वे पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलने से बचते नजर आए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण मौकों पर, जब विपक्ष को एकजुट होकर विरोध करना था, तब उन्होंने दूरी बनाए रखी. आतिशी ने यह भी कहा कि पार्टी ने शुरुआत में उन्हें संदेह का लाभ दिया, लेकिन बार-बार एक जैसी स्थिति बनने से सवाल खड़े होना स्वाभाविक है.

बढ़ती बयानबाजी से क्या संकेत?

इस पूरे घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है. पहले जहां मतभेद अंदरूनी माने जा रहे थे, अब वे सार्वजनिक मंच पर दिखाई दे रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक पद का मामला नहीं, बल्कि पार्टी लाइन, विचारधारा और नेतृत्व के प्रति प्रतिबद्धता का सवाल बन गया है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद यहीं थमता है या पार्टी के भीतर और बड़े बदलावों का कारण बनता है.

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