Precautions Before Rent Your House: बिना जांच पड़ताल और पूरी जानकारी के घर किराए पर देने से मुश्किल खड़ी हो सकती है. इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कुछ खास बातों पर ध्यान रखना जरुरी है. ताकी प्रॉपर्टी का गलत इस्तेमाल या खाली करने से मना करना, किराया देने में देरी करना, और समय पर मेंटेनेंस फ़ीस से जुड़ी किसी समस्या का सामना न करना पड़े. अधिकतर लोग इस बात से सहमत होंगे कि घर किराए पर देना एक मुश्किल काम है. अगर इसे ठीक से संभाला न जाए, तो यह एक बड़ी परेशानी बन सकता है और कई समस्या पैदा हो सकती है.
बैकग्राउंड की जांच
घर किराए पर देने समय पहले यह पक्का कर लेना चाहिए, तो जो लोग किराए पर रहने आए हैं, वे वहां रहने लायक हैं कि नहीं. सही बैकग्राउंड की जांच करने के लिए, आप उनके पिछले मकान मालिक, काम करने की जगह और दोस्तों से जानकारी ले सकते हैं. वहींआपका किराएदार किसी भी अपराध में शामिल नहीं है, इसके लिए किराए का एग्रीमेंट साइन करने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन करवाना बहुत जरूरी है. यह किराएदार की पहचान की पुष्टी करके मालिकों को सुरक्षित रखता है. किराएदार वेरिफिकेशन ऑनलाइन और ऑफ़लाइन, दोनों तरीकों से किया जा सकता है.
प्रॉपर्टी के मालिकाना हक के दस्तावेज
भविष्य में किसी भी तरह की समस्या होने पर आपके पास अपना घर किराए पर देने से जुड़े सभी जरुरी मालिकाना हक के दस्तावेज मौजूद होने चाहिए. राज्य की जमीन से जुड़ी जानकारी देने वाली वेबसाइट पर जाकर प्रॉपर्टी के दस्तावेज देख सकते हैं और उन्हें हासिल कर सकते हैं. जिनकी ज़रूरत आपको अपने किराए के एग्रीमेंट के लिए पड़ सकती है.
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किराया, टेनेंसी या लीज एग्रीमेंट
किराए का एग्रीमेंट एक ऐसा कॉन्ट्रैक्ट होता है, जिस पर मकान मालिक और किराएदार, दोनों दस्तखत करते हैं. जिसका मकसद किराएदारी की शुरुआत करना और उसे ठीक से चलाना होता है. घर किराए पर देने से पहले आपको यह पक्का कर लेना चाहिए कि आपने सही किराए का एग्रीमेंट तैयार कर लिया है. किराए के एग्रीमेंट में दोनों पक्षों यानी मकान मालिक और किराएदार के बारे में जानकारी के साथ-साथ किराएदारी से जुड़ी शर्तें और नियम भी शामिल होते हैं. दोनों पक्षों को किराए एग्रीमेंट में शामिल नियमों का पालन करना होता है. मकान मालिक और किरायेदार के नाम और पते, किरायेदारी की शर्तें, किरायेदारी की अवधि, किराया और सिक्योरिटी डिपॉज़िट की रकम, दोनों पक्षों पर लागू पाबंदियाँ, समझौता खत्म करने की शर्तें, समझौता रिन्यू करने की शर्तें, और मेंटेनेंस फीस, मरम्मत वगैरह जैसे खर्चों के लिए कौन ज़िम्मेदार होगा, यह सभी शर्ते इसमें शामिल होती हैं.
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