भारत के इस राज्य में महिलाएं नहीं कर रहीं शादी, तेजी से बढ़ रहा अविवाहितों का आंकड़ा

Unmarried Women : कई सारी वजहों से भारत के इस राज्य में शादीयों कमी देखने को मिल रही है. अविवाहित महिलाओं का आकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा है.

Published by Shubahm Srivastava

Unmarried Women : भारत में एक समय था जब महिलाओं की आवाज़ दबा दी जाती थी। उन्हें किसी भी फ़ैसले में प्राथमिकता नहीं दी जाती थी। चाहे वह वैवाहिक फ़ैसला ही क्यों न हो। लेकिन अब जैसे-जैसे समय बदल रहा है, महिलाएं अपनी आवाज उठा रही हैं। इसमें पितृसत्तात्मक समाज की महिलाएं भी शामिल हैं, जिनकी पीढ़ियों से अपने वैवाहिक फ़ैसलों में बहुत कम दखलअंदाज़ी होती थी। 

लेकिन जैसे-जैसे सामाजिक मानदंड बदल रहे हैं – खासकर शहरी इलाकों में वहां पर ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएं अब इस चीज का अधिकार मांग रही हैं कि वो अब किससे और कब शादी करेंगी या करेंगी भी की नहीं इसका फैसला भी वहीं करेंगी. जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की तरफ से कम हो रही शादी भी चिंता का विषय बना हुआ है. चलिए जानते हैं इसके पीछे क्या कारण है. 

शादी कम होने के पीछे का क्या है कारण?

जम्मू-कश्मीर में अविवाहित महिलाओं की बढ़ती संख्या के पीछे कई कारण हैं, जिनमें से पहला आर्थिक अस्थिरता और बेरोज़गारी है। पिछले कुछ समय से राजनीतिक अस्थिरता के कारण युवाओं को अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। इससे विवाह में दहेज प्रथा, समारोह और विवाहेतर ज़िम्मेदारियों जैसे कई खर्च बढ़ जाते हैं। इस वजह से, पुरुष और महिलाएं समान रूप से अपनी शादी को तब तक टालते रहते हैं जब तक वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं हो जाते, जो ज़्यादातर लोगों के लिए मुश्किल होता है।

इसके अलावा, युवा वर्ग शिक्षा को भी बहुत महत्व दे रहा है. इस वजह से वे अपनी शादी टाल देते हैं. इसलिए, शादी की योजनाएं या तो टल सकती हैं या हमेशा के लिए टल सकती हैं.

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जम्मू-कश्मीर में अविवाहित महिलाओं का आकड़ा

एसआरएस सांख्यिकी रिपोर्ट 2023 पर नजर डालें तो जम्मू-कश्मीर में अविवाहित महिलाओं की संख्या 44 फीसदी है. वहीं अगर साल 2022 की बात करें तो उस वक्त यह आंकड़ा 43 फीसदी था. इसमें विधवा और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं. गौर करने वाली बात यह भी है कि जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की शादी की औसत उम्र में भी बढ़ोतरी देखी गई है.

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की शादी की औसत उम्र राष्ट्रीय औसत 22.1 साल की तुलना में बढ़कर 24.7 साल हो गई है. 1990 के माइग्रेशन से पहले जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की शादी की औसत उम्र 21 साल थी. 

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