क्या 6 घंटे की नींद लेना काफी? बदल देगी लाइफस्टाइल या बना देगी बीमारियों का घर, क्या कहते हैं आयुष्मान खुराना के डॉक्टर

6 Hour Sleep: हम सब जानते हैं कि अच्छी सेहत के लिए नींद बहुत ज़रूरी है. नींद हमारे शरीर और दिमाग को आराम देती है, जिससे हम अगला दिन ताज़गी से शुरू कर पाते हैं. कई बार काम, तनाव या दिनचर्या की वजह से पूरी नींद लेना मुश्किल हो जाता है

Published by Heena Khan

Sleep Cycle: हम सब जानते हैं कि अच्छी सेहत के लिए नींद बहुत ज़रूरी है. नींद हमारे शरीर और दिमाग को आराम देती है, जिससे हम अगला दिन ताज़गी से शुरू कर पाते हैं. कई बार काम, तनाव या दिनचर्या की वजह से पूरी नींद लेना मुश्किल हो जाता है, लेकिन अगर यह आदत बन जाए तो सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. अमेरिकन अकैडमी ऑफ़ स्लीप मेडिसिन के अनुसार, एक वयस्क व्यक्ति को हर 24 घंटे में कम से कम सात घंटे की नींद लेनी चाहिए. अगर आपको लगता है कि आप रोज़ सिर्फ छह घंटे सोकर भी ठीक महसूस करते हैं, तो यह हमेशा सही नहीं होता. शुरुआत में भले ही थकान ज़्यादा महसूस न हो, लेकिन धीरे-धीरे कम नींद का असर शरीर पर जमा होने लगता है.

क्या छह घंटे की नींद सच में काफी है?

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश वयस्कों के लिए छह घंटे की नींद पर्याप्त नहीं होती. कुछ लोग सोचते हैं कि उन्हें कम नींद की आदत है, लेकिन सच यह है कि लगातार कम सोने से शरीर की ऊर्जा और दिमाग की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है. नींद की कमी से मूड खराब होना, तनाव बढ़ना, ध्यान कम लगना और कई तरह की शारीरिक बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है. नींद वह समय है जब शरीर खुद को ठीक करता है—कोशिकाएँ रिपेयर होती हैं, दिमाग दिनभर सीखी चीज़ों को व्यवस्थित करता है, और रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. इसलिए रोज़ाना कम सोना धीरे-धीरे स्वास्थ्य पर बड़ा असर डाल सकता है.

7 से 9 घंटे सोने की सलाह क्यों दी जाती है?

मेयो क्लिनिक के स्लीप विशेषज्ञ डॉ. भानु कोल्ला बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को बिना अलार्म के प्राकृतिक रूप से जितनी नींद चाहिए वह लेने को मिले, तो ज्यादातर वयस्क 7 से 9 घंटे के बीच ही सोते हैं. यह बात एक तरह के “बेल-शेप कर्व” यानी घंटी के आकार वाले ग्राफ़ से समझाई जाती है, जिसमें अधिकांश लोगों की नींद की ज़रूरत इसी रेंज में आती है. इसका मतलब है कि हमारी शरीर की सामान्य जरूरतें लगभग सात से नौ घंटे सोकर ही पूरी होती हैं. बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिन्हें इससे कम नींद में भी पूरी ऊर्जा मिलती है—लेकिन यह बेहद दुर्लभ है. इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अच्छी सेहत, बेहतर मूड और तेज़ दिमाग के लिए हर वयस्क को कम से कम सात घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए.

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क्या कहते हैं आयुष्मान खुराना के डॉक्टर

आयुष्मान खुराना के छह घंटे सोने की रूटीन के बारे में डॉक्टरों का कहना है कि यह नींद की कमी है और इससे उनके दिमाग, दिल और इम्यून सिस्टम को नुकसान हो सकता है, क्योंकि आमतौर पर वयस्कों को 7-9 घंटे की नींद की ज़रूरत होती है. वे चेतावनी देते हैं कि यह एक धीमा ज़हर है जिससे थकान और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, और उन्हें अपनी सोने की आदतें सुधारनी चाहिए.

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