Categories: मनोरंजन

Behind the Lens: कैमरे के पीछे! जानिए कैसे दशकों में बदलती बॉलीवुड फैशन की कहानी

Behind the Lens: अगर भारत के सांस्कृतिक इतिहास के पन्ने पलटे जाएं, तो यह साफ हो जाएगा कि सबसे ज़्यादा डायनामिक, प्रभावशाली और शानदार पन्ने बॉलीवुड की दुनिया से भारतीय फैशन की शैली में लिखे गए है.

Published by Mohammad Nematullah

Behind the Lens: अगर भारत के सांस्कृतिक इतिहास के पन्ने पलटे जाएं, तो यह साफ हो जाएगा कि सबसे ज़्यादा डायनामिक, प्रभावशाली और शानदार पन्ने बॉलीवुड की दुनिया से भारतीय फैशन की शैली में लिखे गए है. हालांकि बॉलीवुड की दुनिया में भारतीय फैशन का सफर सिर्फ़ कपड़ों के बारे में नहीं है. यह देश की धड़कनें उसके बदलाव, उसकी आर्थिक गतिशीलता और कभी न खत्म होने वाली महत्वाकांक्षाओं के बारे में है. यह ब्लैक एंड व्हाइट दिनों की सादी साड़ियों से लेकर आज के रेड कार्पेट पर वर्ल्ड-क्लास फैशन तक का सफर है.

लेंस के पीछे यह नजर सिर्फ़ सुंदर ड्रेस को याद करने के बारे में नहीं है. यह समझने के बारे में है कि फिल्म निर्माताओं और डिजाइनरों ने कपड़े, रंग और सिलुएट का इस्तेमाल करके कैसे किरदार बनाए है. एक युग को परिभाषित किया और आखिरकार पूरे उपमहाद्वीप के भारतीय सिनेमा फैशन ट्रेंड्स को आकार दिया है. आइए रील को रिवाइंड करें और देखें कि कैसे बॉलीवुड स्टाइल आइकन्स ने एक देश को रंग पैटर्न और सेक्विन में सपने देखना सिखाया है.

स्वर्ण युग (1950-60 का दशक): संयम में सुंदरता

A post shared by Kangana Ranaut (@kanganaranaut)

हिंदी सिनेमा का आज़ादी के बाद का दौर काव्यात्मक रोमांस और शाश्वत सुंदरता की विशेषता थी. फैशन इसी आदर्शवाद का विस्तार था. मधुबाला और मीना कुमारी जैसी अभिनेत्रियों ने एक नाज़ुक अलौकिक सुंदरता को अपनाया है. प्रतिष्ठित बॉलीवुड आउटफिट्स के बारे में सोचें जो परंपरा से भरपूर थे लेकिन अपने अंदाज़ में लुभावने थे. मुग़ल-ए-आज़म में बॉर्डर वाली क्लासिक सफ़ेद साड़ी, संगम की शिफॉन साड़ियां जो सुरम्य स्विस बैकग्राउंड में लहराती थी.

यहां बॉलीवुड कॉस्ट्यूम डिज़ाइन सूक्ष्मता के बारे में था. कपड़े मुलायम शिफॉन जॉर्जेट और बढ़िया कॉटन के थे. ध्यान शानदार ड्रेप, सूक्ष्म कढ़ाई और एक अछूती सुंदरता के आभा पर था. वह सुंदर व्याकरण जिससे भविष्य के सभी बॉलीवुड फैशन ट्रेंड्स निकलते है.

ज़ीनत-जर्दा दशक (1970 का दशक): विद्रोही मोड़

A post shared by Zeenat Aman (@thezeenataman)

अगर 60 के दशक में फुसफुसाहट थी, तो 70 के दशक के बॉलीवुड फैशन ने ज़ोर से आवाज लगाई है. यह डिस्को बॉल का दशक था. बॉलीवुड फैशन ने खुशी-खुशी रोशनी को अपनाया है. असली क्रांति ज़ीनत अमान के साथ आई थी. उन्होंने सिर्फ़ कपड़े नहीं पहने उन्होंने एक एटीट्यूड पहना है. हरे रामा हरे कृष्णा में उन्होंने भारत में हिप्पी चिक लुक, बेल-बॉटम, हेडबैंड और कुर्ते पेश किए है. कुर्बानी में उनका पीला स्विमसूट सीन सिर्फ़ बोल्ड नहीं था. यह एक सांस्कृतिक बदलाव था. 70 के दशक के इस बॉलीवुड रेट्रो फैशन के दौर में बॉलीवुड स्टाइल में पारंपरिक से लेकर समकालीन वेस्टर्न फ्यूजन तक एक बड़ा बदलाव देखा गया है. पॉलिएस्टर जैसे सिंथेटिक कपड़े पॉपुलर हो गए. रंग बोल्ड हो गए कपड़े बॉडी-कॉन्शियस हो गए, और स्क्रीन सायरन को कॉन्फिडेंट, मॉडर्न और बेझिझक सेक्सी के रूप में फिर से परिभाषित किया गया है. यह पारंपरिक ढांचे में पहली बड़ी दरार थी.

रोमांटिक और अनोखे 80-90 के दशक: अति और रोजमर्रा

A post shared by Kajol Devgan (@kajol)

Related Post

80 के दशक में शानदार बिना किसी पछतावे वाली अति को अपनाया गया. रेखा की भारी कांजीवरम साड़ियों, ऊंचे बालों और ड्रामैटिक आईलाइनर के बारे में सोचिए एक ऐसा लुक जिसने उन्हें बॉलीवुड स्टाइल आइकन के रूप में स्थापित किया गया है. शोल्डर पैड नियॉन और सेक्विन हर जगह थे. यह “डिजाइनर” लेबल के मुख्यधारा में आने का दौर था, जिसमें भानु अथैया जैसे नामों ने इतिहास रचा है.

90 के दशक के बॉलीवुड फैशन ने एक दिलचस्प विरोधाभास पेश किया है. यह दो समानांतर ट्रैक में बंटा हुआ है. एक ट्रैक यश राज फिल्मों का शानदार रोमांस था, जहां बारिश में शिफॉन साड़ियां (दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे) बॉलीवुड ग्लैमर का सबसे बड़ा प्रतीक बन गईं. दूसरा ट्रैक राजा हिंदुस्तानी जैसी फिल्मों में “पड़ोस की लड़की” का उदय था, जहां करिश्मा कपूर के साधारण घाघरे और पेट दिखाने वाले ब्लाउज ने देश भर में एक ट्रेंड शुरू किया गया है. इस दोहरेपन ने दिखाया कि बॉलीवुड फैशन शानदार और साथ ही भरोसेमंद रूप से प्रेरणादायक हो सकता है.

वैश्वीकृत 2000 का दशक: डिजाइनर युग और ब्रांड उन्माद

A post shared by Kajol Devgan (@kajol)

नई सहस्राब्दी ने एक पेशेवर और वैश्विक बदलाव को चिह्नित किया है. बॉलीवुड कॉस्ट्यूम डिजाइन अब सिर्फ स्टूडियो टेलर का क्षेत्र नहीं रहा है. यह मनीष मल्होत्रा ​​जैसे बॉलीवुड फैशन डिजाइनरों का खेल का मैदान बन गया, जिन्होंने असल में कुछ कुछ होता है और कभी खुशी कभी गम में अपने चमकदार, NRI-अनुकूल ग्लैमर से एक युग को आकार दिया है.

इस 2000 के दशक के बॉलीवुड फैशन में फैशन इन्फ्लुएंसर का तेजी से उदय हुआ है. अभिनेता चलते-फिरते ब्रांड एंबेसडर बन गए. अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में रेड कार्पेट पर उपस्थिति को फिल्म प्रदर्शन जितना ही बारीकी से देखा जाने लगा है. लुक पॉलिश्ड, ब्रांडेड और मीडिया-सेवी था. पश्चिमी लग्जरी लेबल सितारों को कपड़े पहनाने लगे, और बंटी और बबली जैसी फिल्मों में भारतीय और पश्चिमी कपड़ों का फ्यूजन निश्चित शहरी स्टाइल बन गया है. 

आज का फैशन (2010s-अभी तक): कई तरह के स्टाइल, पर्सनल रिवाइवल

A post shared by Kajol Devgan (@kajol)

बॉलीवुड में आज का फैशन आसानी से समझ में नहीं आता, और यही बात इसे इतना फैशनेबल बनाती है. यह फैशन के अलग-अलग ट्रेंड्स का सोच-समझकर बनाया गया संगम है. विद्या बालन और कंगना रनौत जैसी एक्ट्रेस की वजह से हैंडलूम फैब्रिक और इंडियन टेक्सटाइल के इस्तेमाल में साफ तौर पर फिर से बढ़ोतरी हुई है.

साथ ही, स्ट्रीट फैशन, फ्लूइड कट्स और मिनिमलिज़्म के साथ बोल्ड स्टेटमेंट एक साथ आते है. फिल्मों में जॉनर में ज़्यादा अंतर होता है, और कॉस्ट्यूम इसे दिखाते हैं, जो गली बॉय के रियलिस्टिक और टफ गारमेंट लुक से लेकर द डर्टी पिक्चर के रेट्रो और ग्लैमरस स्टाइल तक होते है. आज बॉलीवुड फैशन आइडल एक गिरगिट की तरह है जो शादी में ट्रेडिशनल साड़ी पहनने से लेकर फिल्म फेस्टिवल में स्लीक पैंटसूट पहनने तक बदल सकता है. कहानी सेल्फ-एक्सप्रेशन पर आ गई है.

A post shared by Balaji Motion Pictures (@balajimotionpictures)

यह बदलाव क्यों मायने रखता है

इस फैशन कहानी को जो चीज़ दिलचस्प बनाती है, वह यह है कि सिनेमा रोज़मर्रा की ज़िंदगी को आकार देना जारी रखे हुए है. स्क्रीन पर पहने जाने वाले कपड़े बाज़ारों को प्रेरित करते हैं, और जो सितारे सस्टेनेबल तरीकों को अपनाते हैं, वे पूरी सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते है. बॉलीवुड स्टाइल सिर्फ़ कॉस्ट्यूम नहीं है; यह एक कल्चरल शॉर्टहैंड है. चाहे वह साड़ी हो जिसने एक पीढ़ी को एलिगेंस के बारे में सिखाया हो या रेड कार्पेट गाउन जो अगले सीज़न का मस्ट-हैव बन गया हो, फिल्म फैशन का असर होता है.

आखिरी बात

दशकों में बॉलीवुड फैशन का सफर असल में आधुनिक भारत की अपनी विज़ुअल आवाज खोजने की कहानी है. यह शांत परंपरा से विद्रोही पश्चिमीकरण, अत्यधिक ग्लैमर से लेकर एक संतुलित, ग्लोबल-व्यक्तिवादी आत्मविश्वास तक पहुंचा. मधुबाला की अनारकली से लेकर दीपिका के पद्मावत लहंगे और आलिया की गंगूबाई साड़ियों तक, हर आइकॉनिक बॉलीवुड आउटफिट एक कल्चरल बुकमार्क है.

अगर आपको ऐसा फैशन पसंद है जो कोई कहानी कहता है, तो फिल्मों को फॉलो करें. अगला वॉर्डरोब मोमेंट शायद पहले से ही स्क्रीन पर नाच रहा हो.

Mohammad Nematullah
Published by Mohammad Nematullah
January 2, 2026 07:25:45 PM IST
Tags: ewsIndia Newsinkhabar newsnews headlinesPolitical Newstop news

Recent Posts

Raihan Vadra Engagement: प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा ने लॉन्गटाइम पार्टनर अवीवा बेग से की सगाई, इंगेजमेंट की पहली तस्वीर आई सामने

Raihan Vadra Aviva Baig Engagement: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा के बेटे…

January 2, 2026

मुस्तफ़िज़ुर रहमान को लेकर विवाद के बीच बांग्लादेश ने किया शेड्यूल जारी, क्या टीम इंडिया करेगी दौरा?

Bangladesh Announced India Tour Schedule: बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने शुक्रवार को घोषणा की है…

January 2, 2026