Rajpal Yadav Jail: आखिर कितने दिन तिहाड़ जेल में रहेंगे राजपाल यादव, चेक बाउंस के क्या हैं नियम और सजा?

Rajpal Yadav in Tihar Jail | Rajpal Yadav Jail | Rajpal Yadav Cheque Bounce Case:: राजपाल यादव की जेल से बचने की सारी कोशिश नाकामयाब हो गई है. दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है.

Published by Preeti Rajput

Rajpal Yadav in Tihar Jail | Rajpal Yadav Jail | Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर राजपाल यादव (Rajpal Yadav) इन दिनों खूब सुर्खियों में है. वह लगातार कानूनी पचड़े में फंसते जा रहे हैं. दरअसल, उनके खिलाफ चेक बाउंस का मामला दर्ज हैं. इस बीच उन्होंने जेल से राहत पाने की जितनी कोशिश की वह सब तब नामाकयाब साबित हुईं, जब दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया. बार एंड बेंच के मुताबिक, राजपाल यादव अदालत की कार्यवाही में मौजूद थे. अब एक्टर ने इस पुराने मामले में तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया. कोर्ट से राहत न मिलने पर राजपाल ने तय समयसीमा के भीतर गुरुवार शाम को 4 बजे कोर्ट के आगे सरेंडर कर दिया.

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजपाल यादव ने सरेंडर की सीमा बढ़ाने के लिए कोर्ट के सामने अर्जी दाखिल की थी. लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी इस अर्जी को खारिज कर दिया है. इसके बाद उन्हें जेल में भेज दिया गया है. आपको बता दें, कि ये मामला वित्तीय लेनदेन और चेक बाउंस से जुड़ा हुआ है. उन्हें इस केस में पहले ही सजा सुनाई जा चुकी है. हाई कोर्ट ने इसी सजा को बरकरार रखा है. हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को दी गई रियायत वापस ले ली थी. उन्हें 4 फरवरी की शाम 4 बजे तक सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था. कोर्ट के मुताबिक, एक्टर ने समझौते की राशि का भुगतान समयसीमा पर नहीं किया. 

Rajpal Yadav Surrender: आखिर कितने दिन तिहाड़ जेल में रहेंगे राजपाल यादव, चेक बाउंस के क्या हैं नियम और सजा?

चेक बाउंस केस में क्या है?

बता दें कि, यह मामला साल 2010 का है. राजपाल यादव ने उस समय अपनी पहली फिल्म ‘अता-पता लापता’ बनाने के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम के कंपनी से करीब 5 करोड़ रुपये कर्ज पर लिए थे. लेकिन, यह फिल्म बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुई. जिसके बाद कर्ज की रकम अदा करने में लगातार देरी होती रही. शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके चेक भी बाउंस हो गए. राजपाल यादव को इस मामले में पहले कड़कड़डूमा कोर्ट की ओर से भी नोटिस भेजे गए. लेकिन वह कोर्ट में पेश नहीं हुए. साल 2013 में उन्हें 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. राजपाल यादव साल 2013 मेंभी 3 दिन तक जेल में रह चुके हैं. लेकिन बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को निलंबित कर दिया था. फिर निचली अदालत ने राजपाल और उनकी पत्नी को छह महीने की कैद की सजा सुनाई. जिसे एक्टर ने हाई कोर्ट में चुनौती दी. साल 2024 में हाई कोर्ट ने एक बार फिर उनकी सजा पर रोक लगाई. राजपाल की तरफ से कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि बकाया राशि जल्द लौटा देंगे. लेकिन, तय समयसीमा में एक भी किश्त जमा नहीं की गई. इस पर एक्टर ने ड्राफ्ट में टाइपिंग की गलती का तर्क कोर्ट में दिया. जिसके कोर्ट ने खारिज कर दिया है. लेकिन अब तक राजपाल यादव ने भुगतान नहीं किया है. 

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चेक बाउंस केस के नियम

चेक बाउंस का मतलब है बैंक ने चेक अस्वीकार कर दिया हो और यह तब होता है जब अकाउंट में पर्याप्त पैसे न हो. चेक बाउंस होने की जानकारी बैंच से मिलने के 30 दिनों के भीतर प्राप्तकर्ता चेक जारीकर्ता को कानूनी नोटिस भेज सकता है. नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर ही चेक जारी कर्ता को भुगतान करना होता है. यदि समय पर भुगतान नहीं किया जाता है, तो 30 दिनों के भीतर मैजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दर्ज की जा सकती है.

चेक बाउंस केस में सजा

  • दोषी को 2 साल तक की कैद हो सकती है.
  • चेक राशि के दोगुने तक का जुर्माना या चेक की राशि के बराबर जुर्माना.
  • बार-बार चेक बाउंस होने से सिबिल (CIBIL) स्कोर खराब हो सकता है, जिससे भविष्य में लोन मिलना मुश्किल होता है.
  • बैंक चेक बाउंस होने पर बैंक द्वारा ₹100 से ₹750 तक का जुर्माना लगा सकता है.
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