Bihar Muslim CM: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री उम्मीदवार और मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित तो कर दिया है. लेकिन सीटों को लेकर समझौता अब तक नहीं हो पाया है. राजद (RJD) 143 सीटों पर, कांग्रेस 61 सीटों पर, वामदलों में भाकपा माले ने 20, भाकपा ने 9 और माकपा ने चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. इसके अलावा, वीआईपी ने 15 सीटों पर प्रत्याशी की घोषणा की है. महागठबंधन द्वारा मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित करने के बाद मुस्लिमों और विपक्षी पार्टियों द्वारा विरोध शुरू हो गया है. मुस्लिमों द्वारा कहा जा रहा है कि आखिर महागठबंधन ने किसी मुस्लिम नेता को उपमुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित क्यों नहीं किया?
चिराग पासवान ने महागठबंधन पर कसा तंज (Chirag Paswan took a jibe at the Grand Alliance)
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुस्लिम मुख्यमंत्री का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. यह चर्चा महागठबंधन द्वारा तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री और मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री घोषित किए जाने के बाद शुरू हुई. महागठबंधन द्वारा इन दोनों पदों के लिए नामों की घोषणा होते ही लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने फरवरी 2005 के चुनावों की याद दिला दी. चिराग पासवान ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बिहार की जनता खासकर मुस्लिम मतदाताओं को याद दिलाया कि उस समय उनके पिता ने मुस्लिम मुख्यमंत्री की मांग के चलते सत्ता ठुकरा दी थी. चिराग ने याद दिलाया कि लालू प्रसाद यादव ने रामविलास पासवान की मुस्लिम मुख्यमंत्री की मांग को ठुकरा दिया था.
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बिहार के एकलौते मुस्लिम मुख्यमंत्री कौन थे? (Who was the only Muslim Chief Minister of Bihar?)
बिहार में किसी मुस्लिम नेता को उपमुख्यमंत्री उम्मीदवार की मांग के बीच आज हम आपको बिहार के इकलौते मुस्लिम मुख्यमंत्री के बारे में बताएंगे, जिनके कार्यकाल में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार पर लाठीचार्ज हुआ था. आइए पूरा मामला क्या था? विस्तार से जानते हैं. जब अब्दुल गफूर बिहार में सत्ता में थे, तब इंदिरा गांधी ने देशव्यापी आपातकाल लगा दिया था. उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सबसे करीबी नेताओं में से एक माना जाता था. हालांकि, राजीव गांधी के कार्यकाल में उन्हें राजनीति से पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया था. जी हां! आप बिल्कुल सही कह रहे हैं. हम बात कर रहे हैं अब्दुल गफूर की, जो बिहार के अब तक के एकमात्र मुस्लिम मुख्यमंत्री थे.
अब्दुल गफूर ने लालू, नीतीश और रामविलास पासवान पर चलवाई लाठियां (Abdul Gafoor used batons on Lalu, Nitish and Ram Vilas Paswan)
बात 1974 की है, जब बिहार के कुछ छात्र सड़कों पर उतर आए. उन्होंने छात्रावास की समस्याओं, कैंटीन और मेस के खर्चों और कॉलेजों में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन किया. समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण भी छात्र आंदोलन में शामिल हुए. बिहार छात्र संघर्ष समिति ने 18 मार्च, 1974 को बिहार विधानसभा का घेराव करने की घोषणा की. 18 मार्च की सुबह पूरे पटना में कर्फ्यू लगा दिया गया. लेकिन लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान जैसे नेता निडर होकर सड़कों पर उतर आए और सड़कें जाम कर दीं. इस बीच, तत्कालीन मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर चाहते थे कि राज्यपाल का अभिभाषण किसी भी कीमत पर हो. सड़कों पर भीड़ तेज़ी से बढ़ती गई.
पटना की सड़कों पर उमड़ी भीड़ की खबर दिल्ली तक पहुंच गई. तभी पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर इंदिरा गांधी का फोन आया. प्रधानमंत्री ने पूछा, “क्या हो रहा है?” इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर ने जवाब दिया कि कुछ नहीं, मैडम. यह कदम कुआं के कायस्थों का विरोध है. लेकिन तेजी से हालात बिगड़ने की वजह से पुलिस ने निहत्थे छात्रों पर लाठीचार् किया और गोलियां चलाईं,जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई थी.
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