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कौन है Vande Bharat का असली मालिक? हर साल Indian Railway देता है 30154 करोड़ का रेंट

Vande Bharat: ट्रेनों का संचालन करने के बावजूद भारतीय रेलवे इनके लिए हर साल भारी भरकम किराया क्यों चुकाता है.

Published by Divyanshi Singh

Vande Bharat Train: वंदे भारत ट्रेनें अपनी तेज़ रफ्तार और आधुनिक सुविधाओं की वजह से पूरे भारत में सफर को बदल चुकी हैं. अब इनका स्लीपर वर्ज़न भी आ रहा है, जिससे इनकी लोकप्रियता और बढ़ गई है. इन ट्रेनों का संचालन करने के बावजूद भारतीय रेलवे इनके लिए हर साल भारी भरकम किराया चुकाता है. जिससे एक दिलचस्प सवाल उठता है कि आखिर वंदे भारत का असली मालिक कौन है.और अगर रेलवे असली मालिक है तो वह इतना खर्च क्यों वहन करता है?

Vande Bharat ट्रेनों का असली मालिक कौन है?

वंदे भारत ट्रेन का मालिक भारतीय रेलवे ही है. ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत इन ट्रेनों का निर्माण चेन्नई और देश के अन्य हिस्सों में स्थित कारखानों में किया जाता है. अब तक रेलवे लगभग 500 कोच बना चुका है, और कुछ तो विदेशों को भी भेजे गए हैं.

Indian Railway अभी भी किराया क्यों देता है?

वहीं ये सवाल किसी के भी मन में आ सकता है कि अगर भारतीय रेलवे ही वंदे भारत ट्रेनों का असली मालिक है तो वह अभी भी हर साल किराया क्यों देता है? बता दें कि इसका कारण इसमें शामिल भारी-भरकम खर्च है क्योंकि इन ट्रेनों के निर्माण पर रेलवे को सालाना अरबों का खर्च आता है.

भारतीय रेलवे के पास इतना बड़ा पैसा एक साथ नहीं होता है. इसलिए वह बाज़ार से धन उधार लेता है.ये उधार IRFC (Indian Railway Finance Corporation) के ज़रिए लिया जाता है.जो रेलवे द्वारा वित्तीय आवश्यकताओं के प्रबंधन के लिए स्थापित एक कंपनी है.

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Indian Railway पैसे को कैसे खर्च होता है ?

भारतीय रेलवे वंदे भारत और अन्य रेलगाड़ियों के डिब्बों के निर्माण, पटरियां बिछाने और निर्माण परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) से प्राप्त फंड का उपयोग करता है. IRFC इन कामों को कराने के लिए फाइनेंस करता है और फिर उन्हें रेलवे को लिज पर दे देता है. बदले में रेलवे यह पैसे वार्षिक ‘किराए’ के ​​रूप में वापस करता है. यह सिस्टम  सुनिश्चित करती है कि रेलवे पर भारी शुरुआती लागत का बोझ न पड़े बल्कि वह रेल संचालन से होने वाली आय के माध्यम से IRFC को धीरे-धीरे चुकाता रहे.

हर साल Indian Railway उधार चुकाने के लिए कितना खर्च करता है ?

वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारतीय रेलवे ने उधार ली गई धनराशि पर मूलधन और ब्याज दोनों को कवर करने के लिए 30154 करोड़ रुपये खर्च किए. इस राशि में से 17000 करोड़ रुपये से अधिक मूलधन के रूप में और 13,000 करोड़ रुपये से अधिक ब्याज के रूप में चुकाए गए.

रेलवे के पास के पास लीज पर कितनी संपत्ति है?

अब तक रेलवे के पास 2.95 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति लीज़ पर है। इसमें वंदे भारत ट्रेनें, करीब 13,000 इंजन और हज़ारों कोच शामिल हैं. यह भारी-भरकम खर्च भारतीय रेलवे के मॉडर्नाइजेशन के पीछे की फाइनेंशियल स्ट्रेटेजी को दिखाता है.

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