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Kharmas: आज से मांगलिक कार्यों पर क्यों लग जाएगी रोक? 14 मार्च से शुरू हो रहा है खास समय, जानें क्या है मान्यता

Bakharmas:14 मार्च की मध्य रात्रि को सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ खरमास शुरू होगा. करीब एक महीने तक विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी. 20 अप्रैल से फिर शुभ मुहूर्त शुरू होंगे.

Published by Ranjana Sharma

Bakharmas: भगवान सूर्य देव 14 मार्च की मध्य रात्रि को मीन राशि में प्रवेश करेंगे. इसके साथ ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस अवधि को अशुभ माना जाता है, इसलिए विवाह सहित कई मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. करीब एक महीने तक शादी-ब्याह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ संस्कार नहीं किए जाते, जिससे मैरिज गार्डन और रिसॉर्ट जैसे आयोजन स्थल भी लगभग खाली हो जाते हैं.

सूर्य के गोचर से शुरू होगा दूसरा खरमास

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा के अनुसार 14 मार्च की मध्य रात्रि 1 बजकर 4 मिनट पर सूर्य देव मीन राशि में गोचर करेंगे. सूर्य के इस राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास प्रारंभ हो जाएगा. ज्योतिष शास्त्र में माना जाता है कि जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस अवधि को खरमास कहा जाता है. यह साल का दूसरा खरमास होगा, जो करीब एक महीने तक रहेगा. इस दौरान विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश और नामकरण जैसे कई मांगलिक कार्यों को करने से परहेज किया जाता है.

एक महीने तक शादियों पर लगेगा विराम

खरमास शुरू होने के साथ ही विवाह समारोहों पर विराम लग जाएगा. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दौरान कोई भी नया शुभ कार्य शुरू करना उचित नहीं माना जाता.इस कारण शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में भी एक महीने का ब्रेक आ जाता है. 20 अप्रैल से दोबारा विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे, जो लगातार 7 जुलाई तक चलेंगे. इस अवधि में बड़ी संख्या में शादियां होने की संभावना रहती है.

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क्यों अशुभ माना जाता है खरमास

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहों के राजा माने जाते हैं. जब सूर्य देव गुरु ग्रह बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में प्रवेश करते हैं, तो उनकी गति अपेक्षाकृत धीमी हो जाती है.ऐसे समय में ग्रहों की ऊर्जा मंद या स्थिर मानी जाती है. मान्यता है कि इस स्थिति में शुरू किए गए शुभ कार्यों का पूरा फल नहीं मिल पाता. इसलिए परंपरागत रूप से इस अवधि में मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है.

ग्रहों की स्थिति का पड़ता है असर

खरमास के दौरान ग्रहों की शुभ दृष्टि का प्रभाव कम हो जाता है. ज्योतिष के अनुसार इस समय ग्रह दशा में बाधाएं भी उत्पन्न हो सकती हैं. इसी वजह से नए कार्यों की शुरुआत को टालने की परंपरा चली आ रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है.

अप्रैल से फिर शुरू होगी शादी की रौनक

खरमास समाप्त होने के बाद 20 अप्रैल से फिर विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे. इसके साथ ही मैरिज गार्डन, बैंक्वेट हॉल और रिसॉर्ट में एक बार फिर शादियों की रौनक लौट आएगी. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जुलाई तक लगातार विवाह मुहूर्त होने से इस अवधि में बड़ी संख्या में शादियां आयोजित होने की संभावना है.

Ranjana Sharma
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