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Premanand Maharaj: पत्नी अगर झूठ बोले या धोखा दे तो क्या करें? जानिए महाराज का जवाब

Premanand Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज की शिक्षाएं और प्रवचन लोगों के जीवन को नई दिशा देते हैं. हाल ही में, एक व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि अगर किसी की पत्नी कठोर वचन बोलती है या धोखा देती है, तो क्या करना चाहिए. आइए जानें कि इस प्रश्न के उत्तर में महाराज जी ने क्या सलाह दिया.

Premanand Maharaj: वृंदावन के प्रसिद्ध संत और गुरु, प्रेमानंद जी महाराज अक्सर अपनी शिक्षाओं और विचारों के लिए चर्चा में रहते हैं. महाराज अपने ज्ञान से लाखों लोगों के जीवन का मार्गदर्शन करते हैं. उनके उपदेश अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं और लोगों को प्रेरित करते हैं. हाल ही में, प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि अगर किसी की पत्नी झूठ बोलती है या धोखा देती है, तो उसे क्या करना चाहिए और किस तरह का व्यवहार उचित है.

प्रेमानंद महाराज से पूछा गया प्रश्न

एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि अगर किसी की पत्नी झूठ बोलती है, कठोर वचन बोलती है, छल करती है या उनका साथ देने से इनकार करती है, तो उसे क्या करना चाहिए. इस प्रश्न पर, प्रेमानंद महाराज ने उत्तर दिया कि अगर कोई झूठ बोलता है या धोखा देता है, तो उसे उससे और भी अधिक प्रेम करना चाहिए.

हर परिस्थिति में अपना कर्तव्य निभाएं

महाराज जी ने कहा, “पति होने के नाते आपका कर्तव्य अपनी पत्नी से प्रेम करना और उसे सुख-सुविधाएँ प्रदान करना है, और आपको इसे पूरी तरह से निभाना चाहिए. यदि आपकी पत्नी अपना कर्तव्य भूलकर आपको कष्ट, कटु वचन या विपत्ति देती है, तो उसे सहन करें और अपने प्रेम में कभी कोई कमी न आने दें. आपको अपना कर्तव्य अच्छी तरह निभाना चाहिए. ईश्वर आपकी पत्नी के कर्तव्य को जानते हैं.”

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ईश्वर आपकी पत्नी में भी हैं

प्रेमानंद महाराज भक्त से कहते हैं कि ईश्वर आपकी पत्नी में भी हैं, इसलिए कभी उनका विरोध न करें. एक पति होने के नाते, उन्हें सलाह दें, लेकिन अगर वह सुनने से इनकार करती हैं, तो क्रोधित होने के बजाय, आपको शांत रहना चाहिए. ऐसा इसलिए है क्योंकि आपके कर्म आपके साथ हैं, और उनके कर्म उनके साथ हैं.

प्रेमानंद महाराज ने सलाह दी

यदि आपकी पत्नी आपको छोड़ देती है, तो कोई बात नहीं. लेकिन अपनी पत्नी का कभी भी त्याग या विरोध न करें. प्रेमानंद महाराज ने कहा, “यदि हम सहनशीलता सीख लें, तो हम अपने परिवारों को बचा सकते हैं, अपनी रक्षा कर सकते हैं, और सबसे गंभीर विपत्तियों का भी सामना कर सकते हैं. आजकल सहनशीलता की इतनी कमी हो गई है कि हम छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित हो जाते हैं. लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए; हमें अपने भीतर सहनशीलता विकसित करनी चाहिए.”

Shivashakti Narayan Singh

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