Categories: धर्म

भौम प्रदोष व्रत में दुलहनें भूल से भी ना करें ये गलती, मुश्किल में फंस सकती है पति की जिंदगी

Pradosh Vrat 2025 Muhurat: जुलाई का पहला प्रदोष व्रत आज 8 जुलाई को है। मंगलवार होने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन आपको विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

Published by Preeti Rajput

Pradosh Vrat 2025 : हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का एक खास महत्व रहता है। यह व्रत हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। हर बार अलग-अलग दिन व्रत होने के कारण इसके नाम में भी अंतर होता है। मंगलवार को पड़ने का कारण इसे भौम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। आज मंगलवार, 8 जुलाई 2025 को भौम प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। इस बार भौम प्रदोष व्रत पर कई रवि योग का संयोग भी बना हुआ है। 

पहली रोटी गाय तो आखिरी रोटी कुत्ते के लिए… सनातन धर्म में क्यों निभाया जाता है ये रिवाज? जहां नहीं होता ये नियम वहां बद से बदतर होते हैं हालात! जानें इसका रहस्य

नियमों का रखें खास ख्याल

भौम प्रदोष व्रत में नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। यह व्रत भगवान शिव और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इस व्रत को करने से कर्ज, रोग, और मंगल दोष से मुक्ति मिल जाती है। यह व्रत मनवविवाहित दुल्हनों के लिए सुखी वैवाहिक जीवन और मंगल दोष निवारण के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन कुछ गलतियां पूरे व्रत के फल को नष्ट कर सकती हैं। इस दिन शादी-शुदा औरतों को काले या चटक रंग के वस्त्र पहने से बचना चाहिए। इससे व्रत की पवित्रता को प्रभावित करते हैं।

भौम प्रदोष व्रत में प्याज, लहसुन, मांस, शराब, या अन्य तामसिक चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए। यह व्रत की पवित्रता को भंग कर देता है। शिवलिंग पर टूटे चावल, केतकी के फूल, या हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए। इससे पूजा का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। व्रत के दिन क्रोध, झूठ, या अपशब्द बोलने से बचें। ऐसा करने से जीवन में तनाव बढ़ जाता है। व्रत में नमक, लाल मिर्च, या अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। 

Related Post

कैसा रहेगा आज का दिन, किसके हिस्से में आएगा धन..किसके हिस्से कंगाली, पढ़े आज का राशिफल

जानें व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत की पूजा घर पर ही बने मंदिर में कर सकते हैं। पूजा के लिए सबसे पहले स्नान कर शारीरिक रूप से शुद्ध हो जाएं और साफ कपड़े पहन लें। फिर शिवलिंग पर जल का अभिषेक करें। उसके बाद पंचामृत का भी अभीषेक किया जा सकता है। भगवान को दूध, गंगाजल, बेलपत्र, सफेद चंदन, अक्षत और फूल अर्पित कें। इसके बाद भौम प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं और भगवान शिव जी का आरती करें। 

Disclaimer: इस आलेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है। पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। इन खबर इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है।

Preeti Rajput
Published by Preeti Rajput

Recent Posts

Bathroom vs washroom: क्या आप जानते हैं ‘बाथरूम’ और ‘वॉशरूम’ में अंतर?

Washroom-Bathroom Difference: अक्सर कुछ शब्द ऐसे होते हैं जो हम डेली यूज करते हैं, लेकिन…

March 22, 2026

Chaitra Navratri 2026: कन्या पूजन में लड़के को बैठाना क्यों है जरूरी? यहां जानें लांगुर का महत्व

Chaitra Navratri 2026: अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन (कंजक पूजन) का विशेष महत्व…

March 22, 2026

Meri Zindagi Hai Tu Drama Episode 34: क्या होगा आयरा और काम्यार का? फिनाले कहां देखें? नोट करें टाइम

Meri Zindagi Hai Tu episode 34 release time India: अब इस ड्रामा का ग्रैंड फिनाले…

March 22, 2026