ज्यादा प्रोटीन से नहीं बनती सेहत, बढ़ सकता है किडनी पर खतरा! जानें कितना प्रोटीन है सही?
Protein Can Be Dangerous: आजकल फिटनेस की शौकीन लोगों, एथलीट और बॉडीबिल्डर के बीच हाई प्रोटीन डाइट एक पॉपूलर ट्रेंड बन गया है. जो फैट कम कर अपनी मसल्स बनाना चाहते हैं. हालांकि, शरीर के वजन के हिसाब से अधिक प्रोटीन खाना सेहत के लिए खरता बन सकता है. 32 इंसानों पर हुई स्टडीज़ को एनालाइज करने के बाद पाया गया है कि बहुत अधिक मात्रा में प्रोटीन लेना खासतौर पर रेड मीट और सप्लीमेंट्स यह किडन और लीवर पर बुरा असर डाल सकता है.
क्यों किडनी के लिए खतरा?
अधिक प्रोटीन खाने से किडनी को ज्यादा फिल्टर करना पड़ता है, जिससे हाइपरफिल्ट्रेशन होता है. इससे किडनी पर काफी दबाव पड़ता है. प्रोटीन के ब्रेकडाउन से यूरिया और अन्य वेस्ट बढ़ते हैं. जो किडनी स्टोन, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी का रिस्क बढ़ सकता है.
कितना प्रोटीन सही है?
सामान्य वयस्कों के लिए रेकमेंडेड डाइटरी अलाउंस (RDA) है 0.8 ग्राम प्रोटीन प्रति किलोग्राम बॉडी वेट खाना चाहिए. एक्टिव या जिम करने वालों के लिए 1.2-1.6 ग्राम/किलो प्रोटीन दिनभर के लिए काफी है.
जिम जाने वालों को प्रोटीन की जरूरत
जिम या वर्कआउट करने के लिए मसल्स बनाने के लिए 1.2 से 2 ग्राम/किलो तक प्रोटीन की होती है. लेकिन इसे भी लिमिट में ही खाना चाहिए. बहुत अधिक लेने से किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है. प्लांट-बेस्ड प्रोटीन (दालें, सोया) आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.
किडनी रोगियों के लिए प्रोटीन की सीमा
अगर आप CKD से ग्रसित हैं, तो प्रोटीन का मात्रा कम ही रखनी चाहिए. स्टेज 1-2 में 0.8-1 ग्राम/किलो, स्टेज 3 में 0.8 ग्राम/किलो, और एडवांस स्टेज में 0.6 ग्राम/किलो या उससे भी कम. वहीं डायलिसिस होने पर इसे थोड़ा बढ़ा सकते हैं, लेकिन केवल डॉक्टर की सलाह पर.
ज्यादा प्रोटीन के अन्य नुकसान
किडनी के अलावा अधिक प्रोटीन लेने से वजन बढ़ सकता है. पेट की समस्या, हड्डियों से कैल्शियम लॉस और हार्ट डिजीज का रिस्क भी बढ़ता है.
सही प्रोटीन सोर्स चुनें
दालें, छोले, राजमा, पनीर, दही, अंडे, चिकन (लीन), मछली, नट्स और सोया. प्लांट-बेस्ड प्रोटीन बेहतर क्योंकि ये किडनी पर कम स्ट्रेस डालते हैं. प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल सीमित रखें.
कैंसर का खतरा
रिव्यू में ज़्यादा मीट और प्रोटीन खाने को कई तरह के कैंसर के ज़्यादा खतरे से जोड़ा गया है, जिसमें कोलन, पेट, पैंक्रियाटिक और ब्रेस्ट कैंसर शामिल हैं. मीट को ज़्यादा तापमान पर पकाने से हेट्रोसाइक्लिक एमाइन बनते हैं, ये कंपाउंड कैंसर पैदा करने वाले माने जाते हैं.