Somnath Mandir: क्या है सोमनाथ मंदिर का इतिहास, भारतीय सभ्यता का प्रतीक 17 बार आक्रमण के बाद भी नहीं हिला
Somnath Mandir: सोमनाथ मंदिर भारत के प्रमुख मंदिरों में से एक है. इस मंदिर पर लगभग 17 बार आक्रमण हुआ और हर बार विनाश के बाद, भारतीय सभ्यता और आस्था के लचीलेपन का प्रतीक बनकर उभरा है. जानते हैं इस मंदिर की खासियत और इस मंदिर का महत्व.
Somnath Mandir
8 से 10 जनवरी तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन किया जा रहा है. ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास होने जा रहा है. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने शेयर की सोशल मीडिया एक्स पर अपनी पुरानी तस्वीरें.
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सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम और अत्यंत पवित्र ज्योतिर्लिंग है. यह मंदिर गुजरात के वेरावल के पास प्रभास पाटन में अरब सागर के तट पर स्थित है. सोमनाथ को सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग माना जाता है.
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ऋग्वेद में स्पष्ट रूप से लिखा है कि मन्दिर का निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, लोककथाओं के अनुसार यहीं श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था. इस कारण इस क्षेत्र का और भी महत्त्व बढ़ गया.
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यह मन्दिर हिंदू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है. सोमनाथ मन्दिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल है. सोमनाथ मन्दिर का इतिहास बड़ा ही सुन्दर है, इस मंदिर में रोज इसका सचित्र वर्णन किया जाता है.
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आज से ठीक 1000 साल पहले सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास का पहला आक्रमण झेला था. साल 1026 में हुआ हमला इस आस्था के प्रतीक मंदिर को हिला ना सका और सोमनाथ मंदिर का बार-बार पुनरोद्धार होता रहा.
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इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सोमनाथ मंदिर की पिछली तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर किया.उन्होंने देशवासियों से भी अपील की कि अगर वे भी सोमनाथ गए हैं, तो अपनी तस्वीरें ‘हैशटैग सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के साथ जरूर शेयर करें.