तीन बार दफनाई गई रानी, जानिए मुग़ल इतिहास की अनकही कहानी
मुगल इतिहास रहस्यों और प्रेम कहानियों से भरा हुआ है, लेकिन उनमें सबसे दिल को छूने वाली कहानी है शाहजहां और मुमताज महल की. आइए जानते हैं उस रानी की अनसुनी दास्तान, जिसे इतिहास ने तीन बार अमर किया.
मुमताज महल कौन थीं
मुमताज महल, जिनका असली नाम अरजुमंद बानो बेगम था, बादशाह शाहजहां की सबसे प्रिय पत्नी थीं. वे अपनी खूबसूरती, समझदारी और विनम्र स्वभाव के लिए जानी जाती थीं.
मुमताज की मौत कैसे हुई
मुमताज महल की मृत्यु 1631 में हुई, जब वह शाहजहां के 14वें बच्चे को जन्म दे रही थीं. यह घटना बुर्हानपुर में हुई, जहां शाहजहां उस समय एक सैन्य अभियान पर थे. प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी जान चली गई.
पहली बार दफन बुर्हानपुर में हुआ
मुमताज की पहली कब्र बुर्हानपुर (मध्य प्रदेश) में बनाई गई थी. यह अस्थायी दफन स्थल था क्योंकि शाहजहां ने निर्णय लिया था कि उनका स्थायी मकबरा यमुना के किनारे बनाया जाएगा.
दूसरी बार आगरा में दफन
जब शाहजहां ने आगरा में मुमताज के लिए ताजमहल बनवाने की योजना बनाई, तब मुमताज का शव बुर्हानपुर से आगरा लाया गया. उस समय उनके पार्थिव शरीर को अस्थायी रूप से एक छोटे से मकबरे में दफनाया गया.
तीसरी और अंतिम बार ताजमहल में दफन
ताजमहल के निर्माण के बाद मुमताज महल के शरीर को तीसरी बार दफनाया गया था. इस बार हमेशा के लिए. यह स्थान आज ताजमहल के केंद्र में स्थित सुंदर संगमरमर की कब्र है.
ताजमहल का निर्माण और प्रतीकात्मकता
ताजमहल का निर्माण 1632 में शुरू हुआ और लगभग 22 वर्षों में पूरा हुआ. इसमें 20,000 से अधिक मजदूरों और कलाकारों ने काम किया
मृत्यु का रहस्य
उनकी मृत्यु शाहजहां के साथ एक अभियान के दौरान हुई थी, और उनकी अस्थायी कब्र से लेकर ताजमहल के स्थायी विश्राम स्थल तक का सफर बेहद मार्मिक है. यह कहानी न केवल प्रेम की गहराई को दर्शाती है
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