दिमाग से कमजोर हो जाएगा बच्चा अगर प्रेगनेंट वुमेन ने खा ली ये चीज
Pregnancy Nutrition Guide: अक्सर जब महिलाएं गर्भावस्था में होती हैं तो उन्हे कुछ-कुछ खाने की क्रेविंग होती है. ज्यादातर लोगों को खट्टा खाने का काफी मन होता है और वहीं कुछ महिलाएं मीठा भी खाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये एक चीज का सेवन करने से आपके आने वाले बच्चे के दिमाग पर काफी असर पड़ सकता है. अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या है तो आइए जानते हैं-
गर्भावस्था में मीठे का कंट्रोल
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अक्सर मीठा खाने की इच्छा होती है. लेकिन ज्यादा मीठा खाना न केवल मां के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी हानिकारक है.
शुगर का बच्चों पर न्यूरोलॉजिकल असर
अमेरिका के क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार, जो महिलाएं गर्भावस्था में शुगर ड्रिंक्स या डाइट सोडा ज्यादा लेती हैं, उनके बच्चों में वर्बल मेमोरी और समस्या सुलझाने की क्षमता कमजोर पाई गई. इससे बच्चे के ब्रेन का विकास प्रभावित होता है.
शुरुआती उम्र में शुगर का असर
जिन बच्चों को जन्म के पहले 2 साल में ज्यादा मीठा दिया गया, उनमें भी न्यूरोलॉजिकल और ब्रेन डेवलपमेंट की समस्याएं देखी गईं. 2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए शुगर बिल्कुल नहीं होनी चाहिए.
सेफ शुगर लिमिट
2 साल से ऊपर के बच्चों के लिए शुगर की सीमा प्रतिदिन 25 ग्राम (लगभग 6 चम्मच) तक होनी चाहिए. जबकि एक कोल्ड ड्रिंक की बोतल में इससे ज्यादा चीनी होती है. इसलिए पैकेज्ड जूस और कोल्ड ड्रिंक्स से बचना जरूरी है.
पैकेज्ड फूड और जूस का जोखिम
अक्सर माता-पिता बच्चों को योगर्ट, ग्रेनोला बार या पैकेज्ड फ्रूट जूस देते हैं, जिसमें छिपी हुई शुगर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. फाइबर न होने की वजह से ये ग्लूकोज लेवल को तुरंत बढ़ा देती हैं.
ताजे फलों का फायदा
ताजे फलों में मौजूद नेचुरल शुगर ब्रेन पर नकारात्मक असर नहीं डालती. फलों का फाइबर ब्लड शुगर के स्पाइक को रोकता है, जिससे एनर्जी का लेवल बना रहता है और मोटापा भी नहीं बढ़ता.
बच्चों में बेहतर स्किल्स के लिए सही खानपान
जो बच्चे ताजे फल खाते हैं, उनमें विजुअल मोटर स्किल्स और वर्बल इंटेलिजेंस बेहतर पाई गई है. इसलिए बच्चों के खाने में प्राकृतिक शुगर शामिल करना और एडेड शुगर से बचना बहुत जरूरी है.