शादी से पहले ससुर की गोद में बैठती है नई दुल्हन, एक बार नहीं कई बार करना पड़ता है ऐसा; क्यों निभाते हैं ये परंपरा?
Nigerian Tradition: नाइजीरिया के दक्षिणी हिस्से में रहने वाली एदो और एसान जनजातियों में एक परंपरा सदियों से चली आ रही है. जिसके बिना शादी का समारोह पूरा नहीं माना जाता है. यह रस्म यहां की हर दुल्हन को पूरी करनी होती है. यहां शादी को पूरा करने के लिए दुल्हन को अपने ससुर या दूल्हे की गोद में 7 से 11 बार बैठना होता है.
ससुर की गोद में बैठती है दुल्हन
इस रस्म के दौरान दुल्हन को अपने नए ससुर या दूल्हे की गोद में बैठना होता है. यह प्रक्रिया 7 से 11 बार करनी होती है. यह रस्म निभाना यहां जरूरी माना जाता है.
क्या है परंपरा का मतलब?
इस रस्म के पीछे एक गहरी सामाजिक मान्यता है, यह दुल्हन के अपने मायके से ससुराल के परिवार में पूरी तरह शामिल होने का प्रतीक है. ससुर की गोद में दर्शाता है कि अब वह उस घर की बेटी बन चुकी है और परिवार के बुजुर्गों ने उसे दिल से स्वीकार कर लिया है.
7 से 11 बार बैठना जरूरी
इसे एक तरह से ट्रांजिशन की रस्म माना जाता है. जो लड़की के नए जीवन की आधिकारिक शुरुआत की घोषणा करती है. नाइजीरियाई संस्कृति में संख्या का बहुत महत्व होता है. दुल्हन का 7 से 11 बार बैठना और उठना इस बात का प्रमाण है कि वह शादी के लिए मानसिक और शारीरिक रुप से पूरी तरह तैयार है.
प्राथनाएं या मंत्र पढ़ने जरूरी
हर बार बैठने पर कुछ विशेष प्राथनाएं या मंत्र पढ़ने होते हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक, इतनी बार इस प्रक्रिया को दोहराने से शादी एकदम अटूट हो जाती है. आने वाले समय में पति-पत्नी के बीच कोई बाधा नहीं आती है. यह रस्म गवाहों और समुदाय के सामने निभाई जाती है.
दुल्हा लगाता है गले
जब दुल्हन निर्धारित संख्या में बैठने की प्रक्रिया पूरा हो जाती है, तो अंत में दुल्हा उसे बाहों में कसकर भर लेता है. दूल्हे का गले लगाना इस बात की तरफ संकेत करता है कि उसने अपनी पत्नी की पूरा जिम्मेदारी उठा ली है. साथ ही अब दुल्हन की पूरी जिम्मेदारी अब ससुराल और पति की हो गई है.
शादी के लिए जरुरी परंपरा
इसके बाद ही शादी को अंतिम रुप से संपन्न माना जाता है. आज के आधुनिक दौर में भी एदो और एसान समुदाय के लोग अपनी इस विरासत को संजोए हुए हैं. हालांकि, बाहरी दुनिया के लिए यह रस्म थोड़ी अजीब हो सकती है. लेकिन नाइजीरियाई समाज में इसे बहुत सम्मानजनक और पवित्र माना जाता है.
पिता और बेटी के रिश्ते का प्रतीक
यह रस्म इस बात की प्रतीक है कि दुल्हन का अपने ससुर के साथ पिता और बेटी जैसा रिश्ता मजबूत रहे. इस तरह की परंपराएं दर्शाती हैं कि दुनिया के हर कोने में रिश्तों को निभाने और उन्हें मान्यता देने के अलग-अलग तरीके होते हैं.