Iran-Israel War: अगर ईरान हुआ तबाह तो कितना होगा भारत को नुकसान? यहां समझें पूरा समीकरण
Middle East Tension: ईरान-इजराइल के बीच चल रही जंग की आग सिर्फ अरब तक ही नहीं फैली. बल्कि इसकी गर्मी भारत तक महसूस की जा सकती है. बता दें कि इज़राइल, ईरान और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच बढ़ता तनाव भारतीय हितों के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो रहा है. बता दें कि भारत के लिए, ईरान सिर्फ़ एक देश नहीं है, बल्कि सेंट्रल एशिया का गेटवे और एनर्जी सिक्योरिटी का एक सेंटर भी है. वहीं अब सवाल उठ रहे हैं कि अगर इस लड़ाई में ईरान तबाह हो गया तो भारत का क्या होगा. या भारत को कितना नुकसान झेलना पड़ सकता है? बता दें कि इससे भारत के व्यापार, डेमोक्रेसी और आर्थिक हितों को ऐसा झटका लगेगा जिसकी भरपाई दशकों तक नहीं हो पाएगी.
क्या होगा भारत का नुकसान
जंग के बीच भारत अपनी "स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी" बनाए रखने की हर संभव कोशिश कर रहा है, लेकिन इसकी असलियत ये है कि ईरान के खत्म होने का भारत पर सीधा और गंभीर असर पड़ सकता है. एनर्जी सिक्योरिटी से लेकर चाबहार पोर्ट के भविष्य तक, भारत के अरबों डॉलर दांव पर लगे हैं.
कच्चे तेल की कीमतें छुएंगी आसमान
बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का 70% से ज़्यादा कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. लेकिन US सेंक्शन की वजह से भारत ने ईरान से अपना तेल इंपोर्ट कम कर दिया है, लेकिन ईरान की ज्योग्राफिकल लोकेशन दुनिया की तेल सप्लाई को कंट्रोल करती है. दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर बहता है, जिसे ईरान कंट्रोल करता है.
चाबहार पोर्ट
चाबहार पोर्ट ईरान में भारत का सबसे बड़ा इज़राइली इन्वेस्टमेंट है. भारत ने इसे पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से मुकाबला करने और अफ़गानिस्तान समेत सेंट्रल एशिया तक पहुँच देने के लिए डेवलप किया था. 2024 में, भारत ने इसके ऑपरेशन के लिए 10 साल के लॉन्ग-टर्म एग्रीमेंट पर साइन किए थे.
सेंट्रल एशिया तक पहुंचना मुश्किल
कज़ाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे सेंट्रल एशिया देशों में पहुंचना मुश्किल हो जाएगा. ज़मीन और ट्रेड रूट के तौर पर भारत के लिए बहुत ज़रूरी हैं. पाकिस्तान भारत को ज़मीन से आने-जाने की इजाज़त नहीं देता, इसलिए ईरान ही एकमात्र रास्ता है. ईरान में बैन का मतलब होगा कि भारत इन देशों से पूरी तरह कट जाएगा.
लाखों भारतीयों पर खतरा
ईरान और आस-पास के मिडिल ईस्ट देशों में 8 मिलियन से ज़्यादा भारतीय बसे हुए हैं. ये भारतीय न सिर्फ़ देश को काफ़ी विदेशी मुद्रा देते हैं बल्कि भारत की इकॉनमी को भी बढ़ावा देते हैं. अगर ईरान और इज़राइल और अमेरिका के बीच युद्ध बढ़ता है, तो पूरे खाड़ी इलाके में असुरक्षा फैल जाएगी. भारत के नागरिकों पर खतरा मंडराने लगेगा.
चीन और पाकिस्तान
ईरान में अस्थिरता से चीन को सबसे ज़्यादा फ़ायदा होगा. चीन पहले से ही ईरान के साथ $400 बिलियन की इन्वेस्टमेंट डील पर काम कर रहा है. अगर ईरान कमज़ोर होता है और भारत पीछे हटता है, तो चीन ईरान की इकॉनमी और बेस पर पूरी तरह से कब्ज़ा कर लेगा. यह भारत के लिए एक बड़ी सिक्योरिटी चुनौती होगी.