Voting Rights Prisoners: जेल में बंद, फिर भी लोकतंत्र का हक बरकरार! इस देश में कैदी भी डालते हैं वोट
Voting Rights Prisoners: भारत के संविधान के मुताबिक, जेल में बंद कैदी वोट नहीं डाल सकते हैं. फिर चाहे वह दोषी हों या अंडर ट्रायल उनमें से किसी को भी वोट देने का अधिकार नहीं है. हालांकि, दुनिया भर के कई देशों में यह स्थिति काफी अलग है. कई देशों कैदियों को चुनाव के दौरान वोट देने की इजाजत नहीं है. इन देशों के कानून के मुताबिक, जेल में रहने से पर्सनल लिबर्टी छिन जाकी है, लेकिन नागरिकता का अधिकार बरकरार रहता है.
किन देशों के कैदी डाल सकते हैं वोट ?
बता दें कि, नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड, आयरलैंड, स्विट्जरलैंड, स्पेन और चेक रिपब्लिक जैसे कई देशों में कैदियों को वोट डालने का पूरा अधिकार है.
पाकिस्तान के कैदी भी देते हैं वोट
कनाडा, साउथ अफ्रीका, इजरायल और पाकिस्तान जैसे देश भी कैदियों को वोट देने का अधिकार देते हैं. यहां कैदी चुनाव में वोट डाल सकते हैं.
ऑस्ट्रेलिया का अलग कानून
ऑस्ट्रेलिया में कानून थोड़ा अलग है. यहां कम सजा काट रहे कैदियों को वोट देने का अधिकार है. यानी 3 से 5 साल तक की सजा काट रहे कैदी वोट डाल सकते हैं.
नागरिकता का अधिकार
दरअसल, कैदियों को वोट देने की इजाजत इसलिए दी गई है, क्योंकि जेल में रहने के दौरान भी व्यक्ति की नागरिकता बनी रहती है. हालांकि, कहीं आने-जाने की आजादी खो जाती है. फिर भी वह अपने देश के ही नागरिक होते हैं.
मुख्य डेमोक्रेटिक अधिकार
बता दें कि, इन देशों में मतदान सिर्फ एक शारीरिक आजादी नहीं बल्कि नागरिकता से जुड़ा एक अहम डेमोक्रेटिक अधिकार माना जाता है.
रिहैबिलिटेशन का मकसद
इस कानून का मकसद रिहैबिलिटेशन है. कई कानूनी सिस्टम सुधार पर भी ध्यान देते हैं. कैदियों को वोट देने की इजाजत देने से उन्हें समाज से जुड़े रहने की मदद मिलती है.
ह्यूमन राइट्स कोर्ट
यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स मानता है कि कैदियों की वोटिंग पर बैन लगाना ह्यूमन राइट्स के सिद्धांतों का उल्लंघन है.
भारत में कैदी नहीं दे सकते वोट
बता दें कि, भारत में रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट 1951 के सेक्शन 62 (5) के तहत कैदियों को वोट देने का अधिकार नहीं है. हालांकि प्रीवेंटिव डिटेंशन में रखे गए कैदियों को पोस्टल बैलेट से वोट देने का अधिकार है.