न पति, न फेरे… फिर भी भोजपुरी गायिका देवी के घर जब गूंजी थी किलकारी! जर्मनी से जुड़ी है उनके बच्चे की यह कहानी
भोजपुरी लोक गायिका देवी ने अपनी सुरीली आवाज़ से तो लाखों दिल जीते ही, लेकिन उनका सबसे साहसी फैसला था बिना शादी के माँ बनना. समाज की पुरानी परंपराओं को चुनौती देकर, विज्ञान और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर ‘सिंगल मदर’ बनने की उनकी यह दास्तां ममता और आधुनिकता की एक बेमिसाल कहानी है.
छपरा की वो बुलंद आवाज़
यह कहानी शुरू होती है बिहार के छपरा जिले की उन गलियों से, जहाँ एक लड़की ने अपनी सुरीली आवाज़ से संगीत का सपना बुनना शुरू किया था. देवी, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीखीं और फिर अपनी गायकी से पूरे उत्तर भारत को अपना दीवाना बना लिया. लेकिन इस शोहरत और सफलता की चकाचौंध के बीच, उनके दिल के एक कोने में एक अलग ही सपना पल रहा था, माँ बनने का सपना.
7 साल का संघर्ष
देवी के लिए माँ बनने का सफर किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं था. उनके पिता प्रमोद कुमार बताते हैं कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था. देवी पिछले 7 सालों से मातृत्व के सुख के लिए कोशिश कर रही थीं. एक कलाकार की ज़िंदगी में जहाँ बाहर तालियां गूँजती थीं, वहीं भीतर एक सूनापन था जिसे भरने के लिए उन्होंने विज्ञान और अपनी हिम्मत का सहारा लेने की ठानी.
जब Science बना उम्मीद की किरण
शादी की पारंपरिक बेड़ियों में बंधे बिना माँ बनने का फैसला लेना समाज में आसान नहीं था. लेकिन देवी ने तय कर लिया था कि वे 'सिंगल मदर' बनेंगी. इसके लिए उन्होंने असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) का रास्ता चुना. जर्मनी के एक स्पर्म बैंक से डोनर की मदद ली गई. यह फैसला उनके साहस और आधुनिक सोच का प्रतीक था, जहाँ एक महिला ने अपने जीवन के सबसे बड़े फैसले पर अपनी मुहर लगाई.
ऋषिकेश की वादियों में गूँजी पहली किलकारी
वो तारीख थी 9 सितंबर, जब पहाड़ों की गोद में बसे AIIMS ऋषिकेश के अस्पताल में देवी के जीवन का सबसे नया और खूबसूरत अध्याय शुरू हुआ. सर्जरी के बाद जब उन्होंने अपने बच्चे को पहली बार गोद में लिया, तो सालों का दर्द और इंतज़ार सिमट गया. उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया पर दुनिया को अपने नन्हे मेहमान से मिलवाया और गर्व से एक ही वाक्य लिखा- "यह मेरा बच्चा है."
गीतों की मल्लिका का नया अवतार
जिन लोगों ने देवी को "पिया गइले कलकत्ता" और "कुएं का ठंडा पानी" जैसे गानों पर थिरकते देखा था, उनके लिए देवी का यह नया रूप चौंकाने वाला और प्रेरणादायक था. "परदेसिया-परदेसिया" और "अंगुरी में डंसले बिया नागिनिया" जैसे सुपरहिट गाने देने वाली इस गायिका ने साबित कर दिया कि एक कलाकार सिर्फ मनोरंजन नहीं करता, बल्कि समाज को नई दिशा भी दे सकता है.
साहस की यह कहानी
देवी की यह कहानी सिर्फ एक जन्म की कहानी नहीं है, बल्कि देश की उन तमाम महिलाओं के लिए एक मिसाल है जो अकेले बच्चा पालने का जज़्बा रखती हैं. डॉ. सोनाली गुप्ता जैसे विशेषज्ञों ने भी इस बात की पुष्टि की कि भारत का कानून (ART एक्ट 2021) अविवाहित महिलाओं को IVF के ज़रिए माँ बनने का पूरा अधिकार देता है. देवी ने बस उस अधिकार को अपने हौसले से हकीकत में बदल दिया.
एक मुकम्मल दास्तां
आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो देवी की कहानी मातृत्व की शक्ति और विज्ञान के वरदान की याद दिलाती है. उन्होंने पारंपरिक समाज की रूढ़ियों को तोड़कर अपनी खुशी चुनी. संगीत की सुरों से लेकर अस्पताल के गलियारों तक, उनका यह सफर सिखाता है कि अगर चाहत सच्ची हो और इरादे मजबूत, तो एक औरत अपने दम पर अपनी दुनिया मुकम्मल कर सकती है.