Petrol Diesel Price Hike: इस राज्य में मिलेगा 5 रुपए महंगा पेट्रोल! जानिए कहां पर सरकार ने दिया जनता को झटका
Himachal Petrol Diesel Price Hike: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों को लेकर लिया गया नया फैसला राज्य की राजनीति और आम जनता दोनों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है. कांग्रेस सरकार ने ईंधन पर प्रति लीटर 5 रुपये तक की बढ़ोतरी का निर्णय लिया है, जिसे ‘अनाथ और विधवा उपकर’ के रूप में लागू किया जाएगा. सरकार इसे सामाजिक कल्याण की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे जनता पर अतिरिक्त बोझ करार दे रहा है.
पेट्रोल-डीजल 5 रुपए महंगा
राज्य सरकार के इस फैसले के तहत पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की जाएगी. इससे आम उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक असर पड़ेगा और रोजमर्रा के खर्च बढ़ने की आशंका है.
'अनाथ और विधवा उपकर' का उद्देश्य
सरकार ने इस बढ़ोतरी को 'अनाथ और विधवा उपकर' का नाम दिया है. इसका उद्देश्य अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए स्थायी आय का स्रोत तैयार करना है, जिससे उनके लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा सकें.
विधानसभा में बिल पारित
हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 को विधानसभा में पेश कर पारित कर दिया गया. 23 मार्च को इस पर चर्चा हुई, जिसमें विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया, लेकिन सरकार ने बहुमत के आधार पर इसे पास करा लिया.
विपक्ष का विरोध
विपक्ष ने इस फैसले को जनता के लिए नुकसानदायक बताया. उनका कहना है कि पहले से ही महंगाई झेल रही जनता पर यह अतिरिक्त बोझ डालना अनुचित है. साथ ही, उन्होंने ‘अनाथ और विधवा उपकर’ नाम पर भी आपत्ति जताई.
कीमतों में संभावित उछाल
इस बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल 90 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो सकता है. पहले से ही राज्य में पेट्रोल पर लगभग 17% और डीज़ल पर 13.9% टैक्स लागू है, जिससे कीमतें और बढ़ेंगी.
महंगाई पर असर
ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा. इससे महंगाई और बढ़ने की संभावना है, जो आम लोगों के बजट को प्रभावित करेगी.
किसानों और पर्यटन पर प्रभाव
विपक्ष का मानना है कि इस फैसले से किसानों, खासकर सेब उत्पादकों पर असर पड़ेगा क्योंकि ढुलाई महंगी हो जाएगी. साथ ही, पर्यटन उद्योग भी प्रभावित हो सकता है, क्योंकि यात्रा और परिवहन खर्च बढ़ेंगे.
मुख्यमंत्री का पक्ष
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उठाया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि इस उपकर से जुटाई गई राशि सीधे वेलफेयर फंड में जाएगी.
आगे की प्रक्रिया
विधानसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक अब राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा और नई दरें लागू हो जाएंगी. आने वाले समय में इसके प्रभाव पर सभी की नजरें रहेंगी.