Alert! रोज कर रहे ये गलती तो हो जाएं सावधान, सूज जाएंगे मसुड़े, दर्द से रातें कटना होगा मुश्किल
Teeth Tips: रोजाना इंसान बहुत सी तरह की गलती करता है जिसका एहसास उसे बाद में होता है. अगर आप भी ये एक गलतियां करते हैं तो सतर्क हो जाएं, वरना उनसे दांत में काफी दिक्कत हो सकती है और कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. आइए जानते हैं कि वे क्या हैं-
ज्यादा जोर से ब्रश करना
कई लोगों को लगता है कि जोर-जोर से ब्रश करने से दांत ज्यादा साफ और चमकदार बनेंगे, लेकिन असल में ये आदत दांतों की ऊपरी परत (इनेमल) को धीरे-धीरे घिस देती है. इनेमल कमजोर होने पर दांतों में झनझनाहट बढ़ जाती है और ठंडा-गरम खाने पर दर्द महसूस होता है. इतना ही नहीं, मसूड़ों में सूजन और ब्लीडिंग की समस्या भी शुरू हो सकती है.
खराब खानपान
आजकल जंक फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैकेज्ड स्नैक्स का चलन बढ़ गया है, जिनमें हाई शुगर और एसिडिक तत्व होते हैं. ये दांतों पर प्लाक बनाते हैं और धीरे-धीरे कैविटी की समस्या बढ़ाते हैं. इसके अलावा बहुत ज्यादा ठंडी या बहुत गर्म चीजें खाने-पीने से भी दांतों की परेशानि बढ़ जाती है.
पानी की कमी
कम पानी पीना सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि आपके दांतों के लिए भी हानिकारक है. पानी मुंह में बनने वाली लार को बढ़ाता है, जो नैचुरल क्लीनर की तरह काम करती है. जब आप कम पानी पीते हैं, तो मुंह में बैक्टीरिया जमा होने लगते हैं, जिससे बदबू, कैविटी और मसूड़ों की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.
एक ही टूथपेस्ट पर निर्भर रहना
हर व्यक्ति के दांतों की समस्या अलग होती है, लेकिन अक्सर घर में एक ही टूथपेस्ट सभी इस्तेमाल करते हैं. अगर आपको सेंसिटिविटी, पीलापन या मसूड़ों की समस्या है, तो आपको स्पेशलाइज्ड टूथपेस्ट की जरूरत हो सकती है. गलत टूथपेस्ट का इस्तेमाल समस्या को और बढ़ा सकता है.
DIY नुस्खों का अंधाधुंध इस्तेमाल
सोशल मीडिया पर दांत चमकाने के कई घरेलू नुस्खे वायरल होते रहते हैं, जैसे बेकिंग सोडा, नींबू या नमक का इस्तेमाल. ये चीजें शुरुआत में असर दिखा सकती हैं, लेकिन लंबे समय में इनेमल को नुकसान पहुंचाती हैं. बिना एक्सपर्ट सलाह के ऐसे DIY ट्रेंड फॉलो करना आपके दांतों की सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है.
ओरल हाइजीन रूटीन अधूरा रखना
कई लोग सोचते हैं कि दिन में दो बार ब्रश करना ही पर्याप्त है, लेकिन ओरल केयर इससे कहीं ज्यादा है. फ्लॉसिंग, माउथवॉश और टंग क्लीनिंग भी उतने ही जरूरी हैं. दांतों के बीच फंसे फूड पार्टिकल्स सिर्फ ब्रश से नहीं निकलते, जिससे बैक्टीरिया बढ़ते हैं.
डेंटल चेकअप को नजरअंदाज करना
अक्सर लोग दांतों में हल्की तकलीफ को नजरअंदाज कर देते हैं और डॉक्टर के पास तभी जाते हैं जब दर्द असहनीय हो जाता है. लेकिन रेगुलर डेंटल चेकअप से समस्याओं का शुरुआती स्टेज में ही पता चल जाता है. इससे न सिर्फ इलाज आसान होता है, बल्कि खर्च और परेशानी भी कम होती है. हर 6 महीने में एक बार डेंटिस्ट के पास जाना एक अच्छी आदत है.