दिल्ली में कितने ऐतिहासिक दरवाजे हैं? जानें एक-एक के नाम
भारत की राजधानी दिल्ली राजनीति, मंदिरों और ऐतिहासिक इमारतों के लिए मशहूर है। इन सबके अलावा यहां कई दरवाजें भी हैं, जो काफ़ी मशहूर हैं। दिल्ली के इन सभी दरवाजों का अपना एक इतिहास है। जिसके बारे में आज हम आपको इस रिपोर्ट के ज़रिए बताने जा रहे हैं।
इंडिया गेट (India Gate)
दिल्ली का इंडिया गेट पूरी दुनिया में मशहूर है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस गेट का पूरा नाम अखिल भारतीय युद्ध स्मारक है। प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के लिए भारत के सबसे बड़े युद्ध स्मारक की आधारशिला फरवरी 1921 में रखी गई थी। इसकी दीवारों पर उन भारतीय सैनिकों के नाम अंकित हैं जिन्होंने अफ़ग़ान युद्ध और प्रथम विश्व युद्ध में अपने प्राणों की न्यौछावर दी थी। इसके साथ ही, 26 जनवरी 1972 को यहां अमर जवान ज्योति भी बनाई गई थी।
दिल्ली गेट (Delhi Gate)
दिल्ली गेट का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने 1638 में करवाया था। बादशाह जामा मस्जिद में नमाज़ अदा करने के लिए इसी गेट का इस्तेमाल करते थे। लाल बलुआ पत्थरों से बने इस गेट को पहले हाथी-पोल के नाम से भी जाना जाता था। यह उस वक्त मुख्य प्रवेश गेट था जो लाल किले को शहर से जोड़ता था। इसलिए, इसका नाम दिल्ली गेट पड़ा।
लाहौरी गेट (Lahori Gate)
लाहौरी गेट दिल्ली में स्थित लाल किले का पश्चिमी गेट है जो लाहौर की ओर खुलता है। इसके कारण इसका लाहौरी गेट नाम पड़ा है।
कश्मीरी गेट (Kashmiri Gate)
कश्मीरी गेट दिल्ली का एक फेमस द्वार है। जो लाल किले और पुरानी दिल्ली (शाहजहांनाबाद) का उत्तरी दरवाजा है। इस दरवाजा का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने करवाया था। कश्मीरी गेट उस सड़क की शुरुआत में पड़ता था, जो कश्मीरी की ओर जाया करती थी। यही कारण है कि इस जगह का नाम ये रखा गया।
अलाई दरवाज़ा (Alai Darwaza)
अलाई दरवाज़ा का निर्माण 1311 में खिलजी वंश के दिल्ली सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया था। यह कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद को चार तरफ़ फैलाने की उनकी योजना का एक हिस्सा था। हालांकि उन्होंने चार दरवाज़े बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन सिर्फ़ अलाई दरवाज़ा ही पूरा हो सका क्योंकि 1316 में उनकी मृत्यु हो गई। यह मस्जिद के दक्षिणी प्रवेश गेट के रूप में कार्य करता है। यह कुतुब परिसर के दक्षिणी भाग में स्थित है।
तुर्कमान गेट (Turkman Gate)
तुर्कमान गेट दिल्ली के सबसे पुराने दरवाजों में से एक है। जो दिल्ली के रामलीला मैदान के पास स्थित है। इस गेट के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण वर्ष 1650 में हुआ था। उस समय यह गेट लाल बलुआ पत्थरों से बनाया गया था। इस गेट का नाम उस समय के प्रसिद्ध संत तुर्कमान बियाबानी के नाम पर रखा गया था। आपातकाल के दौरान तुर्कमान गेट पर बुलडोजर चलाने की घटना एक बहुत ही चर्चित कहानी है।
अजमेरी गेट (Ajmeri Gate)
दिल्ली में कुल 14 गेट बनाए गए थे, जिनमें से एक अजमेरी गेट है। इसका निर्माण 1644 से 1649 के बीच शाहजहांनाबाद (पुरानी दिल्ली) के 14 दरवाजों में से एक के रूप में किया गया था। इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने करवाया था। इस दरवाजे के नाम के पीछे की वजह ये है कि यहां से रास्ता सीधे राजस्थान स्थित अजमेर शरीफ की ओर जाता था।
खूनी दरवाजा (Khooni Darwaaza)
खूनी दरवाजा जिसे लाल दरवाजा के नाम से भी जाना जाता है। दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर दिल्ली गेट के पास स्थित है। यह दिल्ली के ऐतिहासिक गेटों में से एक है। यह पुरानी दिल्ली से लगभग आधा किलोमीटर दक्षिण में, फिरोज शाह कोटला मैदान के सामने स्थित है। इस गेट का निर्माण शेरशाह सूरी ने 16वीं शताब्दी के मध्य में करवाया था। इतिहास में इस गेट से जुड़ी कई भयावह कहानियां दर्ज है। मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने बड़े भाई दारा शिकोह का सिर काटकर इसी गेट पर लटका दिया था। इस गेट पर यह पहली हत्या थी और हत्याओं का यह सिलसिला 1947 तक जारी रहा।
अब दिल्ली मे कई ऐसे गेट, बेहद खराब स्थिति में है
इन गेटों के अलावा भी दिल्ली में कई ऐसे गेट अलग-अलग जो कि दिल्ली के शासकों की तरफ से बनवाए गए थे। लेकिन अब ये गेट बेहद खराब स्थिति में है या फिर उन्हें देखकर यह पता भी नहीं लगाया जा सकता है कि यहां पर कोई कभी ही गेट हुआ करता था। इनमें से कुछ के तो नामोनिशान भी अब नहीं बचे हैं।
आप यहां मुफ्त में सारे गेटों का आनंद ले सकते है
दिल्ली में बनाए गए इन सभी गेटों को आप मुफ्त में देख सकते हैं। वहीं यहां पर आप कभी भी जा सकते हैं। इनमें से ज्यादातर गेट की दिल्ली की किसी न किसी मुख्य सड़क पर आपको देखने को मिल जाएंगे। यहां पर जाने के लिए किसी भी तरह का कोई टिकट भी नहीं लगता है।