खतरनाक लेकिन जरूरी? जानिए 9 ऐसे मेडिकल ट्रायल और थेरेपी जो बदल रहे हैं इलाज का तरीका
Medical trials and therapy: बीमारी कोई भी हो आपकी लापरवाही उसे और गंभीर बना देती है. यह स्थिति धीरे-धीरे जानलेवा बन जाती है. यह ध्यान रखना जरूरी है कि समय पर टेस्ट न करवाने या लक्षणों को नजरअंदाज करने से इन्फेक्शन फैलता है और शरीर को नुकसान पहुंचाता है. इसलिए बीमारी गंभीर होने से पहले उसकी पहचान करना और उसका इलाज करना बहुत जरूरी है. आम तौर पर, लोगों को कई बीमारियों और उनके इलाज के बारे में बहुत कम जानकारी होती है. आज हम आपको 9 मेडिकल ट्रायल और थेरेपी के बारे में बताएंगे जो आपके इलाज के तरीके को बदल सकते है.
डायबिटीज: सिर्फ़ 9 महीनों में 16.6% वजन कम होगा (Diabetes: You can lose 16.6% of your weight in just 9 months)
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के अनुसार दो ट्रायल चल रहे है. ओरल वैगोप्रिल और कैरिप्राज़ीन ये 64 हफ़्तों में 16.6% वजन कम करेंगे और इंसुलिन की जरूरत को भी कम करेगा.
टीबी: वैक्सीन से 50% तक सुरक्षा मिलने की उम्मीद (TB: The vaccine is expected to provide up to 50% protection)
गेट्स मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ट्रायल कर रहा है. शुरुआती नतीजों में 50% तक सुरक्षा दिखी है. विशेषज्ञ इसे 100 सालों में सबसे ज़्यादा उम्मीद जगाने वाली वैक्सीन मानते है. यह इस साल उपलब्ध होगी.
HIV: 75% मरीज़ों में बीमारी कंट्रोल में देखी गई (HIV: The disease was found to be under control in 75% of patients)
रॉकफेलर इंपीरियल कॉलेज और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी ट्रायल कर रहे है. ये लंबे समय तक असर करने वाली एंटीबॉडी HIV को कंट्रोल करने में मदद करती है. 75% मरीज़ों में वायरस 5 महीनों तक कंट्रोल में रहा है.
हार्ट अटैक: सूजन कम करने वाली दवा बनाई जा रही है (Heart attack: A drug to reduce inflammation is being developed)
नोवो नॉर्डिस्क ट्रायल कर रहा है. यह IL-6 को ब्लॉक करता है, जिससे सूजन बढ़ती है. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है. इसे कोलेस्ट्रॉल के इलाज का पूरक माना जाता है.
एंग्जायटी: तुरंत राहत मिलेगी, रोज लेने की जरूरत नही (Anxiety: Provides immediate relief, no need to take it daily)
मिनीमेड और विस्टाजेन ट्रायल कर रहे है. पैनिक अटैक में तेज़ी से असर करता है. रोज दवा लेने की जरूरत कम हो जाती है. यह दिमाग के सेरोटोनिन सिस्टम को टारगेट करता है, जिससे एंग्जायटी और स्ट्रेस कम होता है.
बचपन का माइग्रेन: अटैक की फ़्रीक्वेंसी और समय कम हुआ (Childhood migraine: The frequency and duration of attacks decreased)
यह इलाज एक ऐसे प्रोटीन को टारगेट करता है जो माइग्रेन अटैक शुरू करने में अहम भूमिका निभाता है. यह अटैक की फ़्रीक्वेंसी को कम करता है. इसे FDA से मंज़ूरी मिल चुकी है. उम्मीद है कि यह 2026 में भारत में उपलब्ध होगा.
गंजापन: बालों के बढ़ने की दर 539% तक (Baldness: Hair growth rate increased by up to 539%)
कॉस्मो फार्मा का ट्रायल तीसरे फेज में है. यह सिर की त्वचा पर काम करता है और शरीर में हार्मोनल साइड इफेक्ट नहीं करता है. गंजेपन की समस्या हल हो जाएगी. बालों के बढ़ने की दर 539% तक है.
रेबीज: एक वैक्सीन दो बीमारियों से बचाएगी (
यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैरीलैंड पहली डुअल वैक्सीन बना रही है जो रेबीज और लासा बुखार से बचाएगी. हर साल 100,000 से 300,000 लोग लासा बुखार से संक्रमित होते है. रेबीज से हर साल 59,000 मौतें होती है.