Success Story : मां की बीमारी, लगातार नाकामी… फिर भी नहीं टूटी हिम्मत, जानें आईएएस पल्लवी वर्मा की कहानी
Success Story : सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है. हर साल लाखों युवा आईएएस बनने का सपना लेकर इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सफलता उन्हीं को मिलती है जो हालात और मजबूरियों से लड़कर आगे बढ़ते हैं. ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है पल्लवी वर्मा की, जिन्होंने तमाम संघर्षों के बावजूद हार नहीं मानी और आखिरकार अपने लक्ष्य को हासिल कर दिखाया.
मुश्किलों के बावजूद पूरा किया सपना
इंदौर की पल्लवी वर्मा ने तमाम मुश्किलों के बावजूद सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर 340वीं रैंक प्राप्त की और अपना आईएएस बनने का सपना पूरा किया.
बायोटेक्नोलॉजी से शुरू हुआ सफर
पल्लवी ने बायोटेक्नोलॉजी में बैचलर्स की डिग्री हासिल की. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब 10-11 महीने तक चेन्नई में सॉफ्टवेयर टेस्टर के रूप में काम किया.
2013 से शुरू की यूपीएससी की तैयारी
साल 2013 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. पहले प्रयास में मेहनत के बावजूद पूरी जानकारी न होने से सफलता हाथ नहीं लगी.
कभी इंटरव्यू तो कभी प्रीलिम्स में अटक गईं
पल्लवी ने कुल पांच अटेम्प्ट दिए. कभी इंटरव्यू तक पहुंचीं तो कभी प्रीलिम्स में ही असफल रहीं. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
मां की बीमारी ने बढ़ाई चुनौतियां
तैयारी के दौरान उनकी मां को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा. परिवार की इस कठिन घड़ी ने पल्लवी को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया.
परिवार का मिला साथ
लगातार असफलताओं और पारिवारिक संकट के चलते उन्होंने परीक्षा न देने का निर्णय लिया था. लेकिन माता-पिता के सहयोग और विश्वास ने उन्हें फिर खड़ा कर दिया.
सातवें प्रयास में मिली सफलता
साल 2020 में पल्लवी ने सातवां अटेम्प्ट दिया और 340वीं रैंक हासिल की. सात साल की मेहनत आखिर रंग लाई.
मजबूत इच्छाशक्ति ने दिलाई सफलता
पल्लवी ने अपनी कमजोरियों को पहचाना, रणनीति बदली और लगातार सुधार किया. उनकी कहानी बताती है कि धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.