क्या आपको भी घर में पेंट कराने बाद होती है खांसी, आखिर क्या है इसकी वजह?
Paint Fumes Health Effects: नया पेंट हुआ कमरा ताजगी और बदलाव का एहसास देता है, लेकिन पेंट की तेज केमिकल जैसी गंध सिर्फ नएपन की निशानी नहीं है. इसमें मौजूद वोलेटाइल कार्बनिक यौगिक (VOC) सांस के जरिए शरीर में जा सकते हैं, जिससे खांसी, गले में खराश और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
पेंट और VOC का खतरा
नए पेंट, वार्निश और थिनर में फॉर्मल्डिहाइड, बेंजीन और टोल्यून जैसे VOC होते हैं. ये हवा में घुलकर सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं.
सांस की दिक्कतें
VOC ब्रॉन्कियल ट्यूब्स में सूजन और म्यूकस बढ़ा सकते हैं. इसके लक्षणों में लगातार सूखी खांसी, घरघराहट और हल्की सांस फूलना शामिल हो सकता है.
संवेदनशील समूह
बच्चे, बुजुर्ग, अस्थमा मरीज और स्मोकिंग करने वाले लोग अधिक जोखिम में हैं. बार-बार एक्सपोजर से एयरवे अधिक संवेदनशील हो सकते हैं.
लंबे समय के प्रभाव
लगातार VOC संपर्क से क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. हेल्दी लोगों में भी लक्षण लंबे समय तक बने रह सकते हैं.
कब जांच करवानी चाहिए
अगर पेंटिंग के 3-4 हफ्ते बाद भी खांसी बनी रहे, तो लंग्स की जांच और फंक्शन टेस्ट करवाना जरूरी है. ये शुरुआती COPD पैटर्न की पहचान में मदद करता है.
वेंटिलेशन का महत्व
खिड़कियां बंद और एसी पर निर्भर रहने से VOC घर में फंसा रहता है. क्रॉस-वेंटिलेशन से हवा का आवागमन बढ़ता है और केमिकल तेजी से बाहर निकलते हैं.
बचाव के उपाय
लो-वीओसी या नो-VOC पेंट चुनें. पेंटिंग के दौरान मास्क पहनें, कमरे को 48–72 घंटे तक खुला रखें और छोटे बच्चों या बुजुर्गों को अस्थायी रूप से दूसरे कमरे में रखें.