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मीठा जहर सूंघकर भविष्य बता देती थी पुजारिन, सिकंदर भी झुकता था अपना सिर; जानें डेल्फी के मंदिर का रहस्य

Oracle of Delphi: प्राचीन ग्रीस के इतिहास में डेल्फी का मंदिर एक ऐसी जगह थी, जहां बड़े-बड़े राज अपनी सिर झुकाते थे. लोगों के मुताबिक, यहां बैठने वाली महिला जिसे पायथिया कहा जाता था. वह सीधे अपोलो देवता से बात करती है. उनसे लोग युद्ध की रणनीति से लेकर घर के झगड़े तक के बारे में सलाह लेने के लिए मीलो दूर से आते थे. कहा जाता है कि महान सिकंदर भी अपनी जीत का आशीर्वाद लेने यहीं पर आए थे. पुजारिन एक तिपाई स्टैंड पर बैठती थी. जिसका आवाज अचानक बदल जाती थी, कांपने लगती और फिर वह अजीब बातें किया करती थी. लोग इसे दैविय शक्ति मानते थे. लेकिन इसके क्या कोई पीछे कोई गहरा और वैज्ञानिक राज छिपा था?


By: Preeti Rajput | Last Updated: March 6, 2026 8:39:12 PM IST

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डेल्फी का रहस्यों से भरा मंदिर

डेल्फी के मंदिर को लेकर इतिहासकार प्लूटॉर्क ने पहली और दूसरी शताब्दी में काफी कुछ लिखा था. प्लूटार्क वहां पुजारी थे, इसलिए उनकी बातों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था. उन्होंने कहा था कि मंदिर एक प्राकृतिक झरने के ऊपर बना था. वहां चट्टानों की दरारों से एक मीठी खुशबू वाली गैस निकली थी, जिसे न्यूमा नाम के जाना जाता था. पुजारिन इसी गैस को सूंघकर समाधि में चली जाती थी.

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भविष्य बताती थी पुजारिन

यह प्रक्रिया इतनी खतरनाक होती थी कि कई बार पुजारिन बेहोश होकर गिर पड़ती थी. उसकी जान तक चली जाती थी. प्लूटार्क ने यह भी लिखा कि उनके समय तक इस गैस का निकलना काफी कम हो गया था,जिससे मंदिर की लोकप्रियता धीरे-धीरे घटने लगी थी, साल 393 में जब यह मंदिर बंध हुआ था, तो यह न्यूमा गैस एक पहेली बनकर रह गई.

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डेल्फी की खुदाई

1892 से 1950 जब डेल्फी की खुदाई हुई, तो शुरुआत में एक्सपर्ट्स को निराशा हाथ लगी थी. उन्हें चट्टानों में कोई बड़ी दरार नहीं मिल पाई थी. उस समय वैज्ञानिकों का मानना था कि गैस सिर्फ ज्वालामुखी वाली जगहों से निकल सकती है.

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1990 के दशक में हुआ खुलासा

डेल्फी में कोई ज्वालामुखी नहीं था, इसलिए उन्होंने प्राचीन कहानियों को मनगढ़ंत मान लिया. लेकिन 1990 के दशक के दौरान आर्कियोलॉजिस्ट जॉन हेल और जियोलॉजिस्ट जेले डेल बोअर ने एक बार फिर से काम करना शुरु किया. तब उन्होंने पाया कि मंदिर के बिल्कुल नीचे से दो ‘फॉल्ट लाइन्स’ (Tectonic Faults) गुजरती नजर आ रही है.

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मंदिर में दरार

बता दें कि, जब जमीन के भीतर की प्लेट्स आपस में रगड़ खाती है, तो घर्षण से गर्मी पैदा होती है. फिर यह गर्मी जमीन में दबे हाइड्रोकार्बन को गैस में बदल देती है. जो दरारों के जरिए सतह पर आने लगती है.

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सैंपल में पाई गई कई गैस

जॉन हेल और उनकी टीम ने डेल्फी की चट्टानों सैंपल भी एकजुट किए थे. जिसके बाद लैब टेस्ट में चौंकाने वाले नतीजे भी सामने आए. चूना पत्थर (Limestone) की चट्टानों में ईथेन, मीथेन और एथिलीन जैसी गैसें भारी पड़ी थी. जिनमें से सबसे खास थी, ‘एथिलीन’.

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मीठा जहर

एथिलीन एक ऐसी गैस है जिसकी महक काफी मीठी होती है. बिल्कुल वैसी ही जैसा प्लूटार्क ने वर्णन किया था. पुराने समय में एथिलीन का इस्तेमाल सर्जरी का इस्तेमाल बेहोश करने के लिए किया जाता था. अगर इसे कम मात्रा में सूंघा जाए, तो इंसान खुद पर काबू नहीं रख पाता है. वह होश में तो रहता है, लेकिन अजीब तरह की हरकतें करने लगता है. यह बिल्कुल वैसा ही था जैसा डेल्फी की पुजारिन के साथ होता था.

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महिलाओं के लिए घातक

इसी घटना को लोग सम्मान और दैविय पद समझते थे. लेकिन यह असल में उन महिलाओं के लिए एक तरह का धीमा जहर था, पॉपूलर सांइस के लेख के मुताबिक, मंदिर का आर्किटेक्चर भी कुछ इस तरह से डिजाइन किया था कि वह गैस एक कमरे में जमा हो जाती थी. जिससे उसका असर काफी घातक हो जाता था.