Ali Khamenei Death: क्यों अपना एक हाथ हमेशा छिपाकर रखते थे खामेनेई; क्या है 1981 के बम धमाके से जुड़ी कहानी
Ali Khamenei Death: इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और गहरा गया है. उनकी मृत्यु के बाद कई देशों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारेबाजी हो रही है और क्षेत्रीय हालात पहले से ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं. ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच यह घटना बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत मानी जा रही है.
दाहिना हाथ लबादे के नीचे छिपाने की वजह
खामेनेई के व्यक्तित्व से जुड़ा एक पहलू अक्सर चर्चा में रहता था—वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपना दाहिना हाथ लबादे के नीचे छिपाकर रखते थे.
1981 की एक घटना
इसके पीछे की वजह 27 जून 1981 की एक घटना से जुड़ी है. उस समय ईरान-इराक युद्ध जारी था और मोर्चे से लौटने के बाद वे एक मस्जिद में नमाज पढ़ने गए थे.
समर्थकों से बातचीत कर रहे थे तभी
नमाज के बाद जब वे समर्थकों से बातचीत कर रहे थे, तभी एक युवक ने उनके सामने टेबल पर टेप रिकॉर्डर रख दिया.
रिकॉर्डर में विस्फोट
कुछ ही देर बाद रिकॉर्डर में विस्फोट हुआ. बाद में सामने आया कि यह हमला फुरकान समूह नामक उग्र संगठन ने किया था, जो ईरान की धार्मिक शासन व्यवस्था का विरोध करता था.
खामेनेई गंभीर रूप से घायल हुए
इस हमले में खामेनेई गंभीर रूप से घायल हुए. उनके दाहिने हाथ और फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचा. महीनों तक चले इलाज के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन उनका दाहिना हाथ स्थायी रूप से प्रभावित हो गया और लकवाग्रस्त हो गया.
बाएं हाथ से लिखना सीखा
उन्होंने बाद में कहा था कि यदि उनका दिमाग और जुबान काम करते रहें तो वही पर्याप्त है. इसके बाद उन्होंने बाएं हाथ से लिखना सीखा और सक्रिय राजनीति व धार्मिक नेतृत्व में अपनी भूमिका जारी रखी.
35 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया
समय के साथ वे ईरान के सर्वोच्च नेता बने और लगभग 35 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया. 86 वर्ष की उम्र में उनकी मौत को ईरानी सत्ता संरचना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
क्या होगा ईरान का भविष्य
विश्लेषकों का मानना है कि पहले से जारी क्षेत्रीय तनाव और बाहरी दबावों के बीच यह घटनाक्रम ईरान की आंतरिक राजनीति और मध्य पूर्व की रणनीतिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है.