क्या सच में मार्च के महीने में पीरियड्स लेट आता है, जानें क्या है इसके पीछे का सच?

March period delay: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें लोग मार्च को लेट पीरियड्स कह रहे हैं. लोगों को लग रहा है कि मार्च के महीने में उनका पीरियड्स धूप और गर्मी की वजह से लेट आया है. आइए जानते हैं इसकी असली वजह-

Published by sanskritij jaipuria

March period delay: अगर इस महीने आपका पीरियड समय पर नहीं आया है और आपको लग रहा है कि कुछ गड़बड़ है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. आजकल बहुत सी महिलाएं इसी तरह की स्थिति का सामना कर रही हैं और सोशल मीडिया पर भी इस बारे में काफी चर्चा हो रही है. लेकिन सच ये है कि हर देरी के पीछे कोई बड़ा कारण या कोई खास महीना जिम्मेदार नहीं होता. कई बार ये सिर्फ हमारे शरीर की सामान्य प्रक्रिया, लाइफस्टाइल और कैलेंडर के फर्क का नतीजा होता है, जिसे हम समझ नहीं पाते और बेवजह चिंता करने लगते हैं.

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें महिलाएं ये दावा कर रही हैं कि मार्च महीने में उनके पीरियड्स लेट हो रहे हैं. लोग इसे ‘मार्च थ्योरी’ कहने लगे हैं और इसके पीछे मौसम में बदलाव, धूप का असर या हार्मोनल शिफ्ट जैसी बातें जोड़ रहे हैं. जब एक साथ कई लोग एक जैसी समस्या बताते हैं, तो ये और ज्यादा सच लगने लगता है. लेकिन असल में ये कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं, बल्कि एक तरह की सामूहिक सोच और संयोग है.

कैलेंडर की वजह से बढ़ती गलतफहमी

पीरियड्स लेट लगने का एक बड़ा कारण कैलेंडर का अंतर भी हो सकता है. फरवरी महीने में केवल 28 दिन होते हैं, जबकि बाकी महीनों में 30 या 31 दिन होते हैं. अगर आपकी पीरियड साइकिल 30 या 31 दिन की है और पिछली बार पीरियड फरवरी की शुरुआत में आया था, तो अगली बार वह मार्च में थोड़ा आगे दिखेगा. इससे ऐसा लगता है कि पीरियड लेट हो गया है, जबकि असल में ये केवल दिनों का गणित है और शरीर अपनी सामान्य गति से ही काम कर रहा होता है.

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 शरीर से जुड़े असली कारण

हर बार देरी का कारण कैलेंडर नहीं होता, बल्कि कई बार हमारे शरीर में होने वाले बदलाव भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं. ज्यादा तनाव लेना, काम का दबाव, नींद पूरी न होना, खानपान में बदलाव या अचानक वजन बढ़ना या कम होना ये चीजें हार्मोन पर असर डालती हैं. जब हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, तो इसका सीधा असर पीरियड साइकिल पर पड़ता है और वह आगे खिसक सकता है.

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 ओव्यूलेशन का टाइम बदलना

पीरियड्स का समय काफी हद तक ओव्यूलेशन पर निर्भर करता है. अगर किसी कारण से ओव्यूलेशन देर से होता है, तो पीरियड भी अपने आप लेट हो जाता है. ये शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है और कभी-कभी ऐसा होना बिल्कुल सामान्य माना जाता है. इसलिए हर देरी को किसी बड़ी समस्या से जोड़ना सही नहीं होता.

हमारी रोजमर्रा की आदतें भी पीरियड्स को प्रभावित करती हैं. जैसे अचानक यात्रा करना, टाइम जोन बदलना, ज्यादा एक्सरसाइज करना या फिर लंबे समय तक अनियमित दिनचर्या रखना. ये सभी चीजें शरीर के हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित कर सकती हैं. यही कारण है कि कभी-कभी पीरियड्स का समय आगे-पीछे हो जाता है.

 

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