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Rajya Sabha news: आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अपने नेतृत्व ढांचे में अहम बदलाव करते हुए राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटा दिया है. उनकी जगह अब अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर और सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, खासकर तब जब चड्ढा हाल के समय में कई जनहित के मुद्दों को जोर-शोर से उठाते रहे हैं.
आधिकारिक तौर पर हुआ बदलाव, राज्यसभा को भेजा गया पत्र
जानकारी के अनुसार, आप नेतृत्व ने गुरुवार को यह बड़ा फैसला लिया और राज्यसभा सचिवालय को इसकी औपचारिक सूचना भी भेज दी. इसके तहत अशोक मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का नया उपनेता नियुक्त किया गया है. अब वे सदन के भीतर पार्टी की रणनीति तय करने, बहसों में नेतृत्व करने और महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने की जिम्मेदारी निभाएंगे.
वहीं, राघव चड्ढा भले ही इस पद से हटा दिए गए हों, लेकिन वे राज्यसभा सांसद के रूप में अपनी भूमिका में सक्रिय बने रहेंगे.
वहीं, राघव चड्ढा भले ही इस पद से हटा दिए गए हों, लेकिन वे राज्यसभा सांसद के रूप में अपनी भूमिका में सक्रिय बने रहेंगे.
फैसले के पीछे दिख रहे सियासी संकेत और कयास
राघव चड्ढा को पद से हटाए जाने के पीछे कई तरह के राजनीतिक संकेत और अटकलें सामने आ रही हैं. पिछले कुछ समय से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और चड्ढा के बीच दूरी की चर्चा हो रही थी. दिल्ली शराब मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के बरी होने के बाद चड्ढा ने न तो उनसे मुलाकात की और न ही सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया दी. उनकी इस चुप्पी ने सियासी हलकों में कई सवाल खड़े किए. ऐसे में उनके पद में कमी को केवल संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है.
संसद में लगातार उठाते रहे आम जनता के मुद्दे
राघव चड्ढा उन नेताओं में रहे हैं जिन्होंने संसद में आम जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया. हाल ही में उन्होंने पितृत्व अवकाश को कानूनी अधिकार बनाने की मांग की थी. उन्होंने तर्क दिया कि बच्चे के जन्म के समय जिम्मेदारी केवल मां की नहीं, बल्कि पिता की भी समान होती है. उन्होंने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र में इस तरह के अवकाश का अभाव है, जबकि बड़ी संख्या में लोग वहीं कार्यरत हैं. उनकी इस मांग के बाद देशभर में पितृत्व अवकाश को लेकर नई बहस छिड़ गई.
बैंकिंग, निवेश और आर्थिक मुद्दों पर सरकार को घेरा
चड्ढा ने संसद में न्यूनतम बैंक बैलेंस न रखने पर लगने वाले जुर्माने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में बैंकों ने ऐसे जुर्मानों के जरिए करीब 19 हजार करोड़ रुपये वसूले हैं, जिसमें पब्लिक और प्राइवेट दोनों सेक्टर शामिल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ये जुर्माने अमीरों पर नहीं, बल्कि किसानों, पेंशनभोगियों और दिहाड़ी मजदूरों जैसे कमजोर वर्गों पर ज्यादा असर डालते हैं. इसके अलावा उन्होंने पश्चिम एशिया में तनाव के कारण भारतीय निवेशकों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाते हुए छोटे निवेशकों के लिए राहत पैकेज की मांग भी की.
एयरलाइन, ट्रैफिक और उपभोक्ता अधिकारों पर भी रहे मुखर
राघव चड्ढा ने एयरलाइन बैगेज पॉलिसी और फ्लाइट देरी पर मुआवजे की कमी को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यात्रियों से अतिरिक्त शुल्क तो लिया जाता है, लेकिन देरी की स्थिति में उन्हें राहत नहीं मिलती. उन्होंने देश के बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या को भी गंभीर बताते हुए नेशनल अर्बन डी-कंजेशन मिशन शुरू करने की मांग की. इसके अलावा जूस में मिलावट, मोबाइल डेटा प्लान में अनयूज्ड डेटा खत्म होने जैसी उपभोक्ता समस्याओं पर भी उन्होंने सरकार और कंपनियों को घेरा.