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Narmada River: कभी पश्चिम तो कभी उत्तर… ये नदी क्यों बदलती रहती है दिशा, जानिए परिक्रमा की परंपरा और पूजा पद्धति

Narmada River: नर्मदा नदी को विश्व की एकमात्र ऐसी नदी माना जाता है जिसकी परिक्रमा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके दर्शन मात्र से ही पुण्य प्राप्त होता है. मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलने वाली यह नदी पश्चिम दिशा में बहती है और कई स्थानों पर उत्तरवाहिनी भी हो जाती है.

Published by Ranjana Sharma

Narmada River: दुनिया में कई पवित्र नदियां हैं, लेकिन नर्मदा नदी को एक अनोखी पहचान प्राप्त है. यह विश्व की एकमात्र ऐसी नदी मानी जाती है जिसकी परिक्रमा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा में स्नान से पुण्य मिलता है, जबकि नर्मदा के सिर्फ दर्शन मात्र से ही वही फल प्राप्त हो जाता है. यही वजह है कि श्रद्धालु हजारों किलोमीटर की कठिन यात्रा कर मां नर्मदा की परिक्रमा करते हैं और इसे आध्यात्मिक साधना का विशेष मार्ग मानते हैं.

भगवान शिव से जुड़ी है उत्पत्ति की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां नर्मदा का जन्म भगवान शिव के पसीने से हुआ था. इस वजह से इसे शिव की पुत्री भी कहा जाता है. माना जाता है कि नर्मदा के तट पर करीब 88 हजार तीर्थ स्थल मौजूद हैं. मान्यता यह भी है कि जहां किसी शिव मंदिर के पास नर्मदा बहती है, वहां स्नान करने से लाखों गंगा स्नान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. इतना ही नहीं, नर्मदा नदी में मिलने वाले छोटे-छोटे कंकड़ों को भी शिवलिंग के समान पवित्र माना जाता है.

अमरकंटक से निकलकर उल्टी दिशा में बहती है नदी

नर्मदा नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित Amarkantak से माना जाता है. मैकल पर्वत की गोद से निकलकर यह नदी पश्चिम दिशा की ओर बहती है और अंत में अरब सागर में जाकर मिलती है. भारत की अधिकतर नदियां पूर्व की ओर बहती हैं, लेकिन नर्मदा का प्रवाह पश्चिम की ओर है. इसी कारण इसे देश की सबसे लंबी पश्चिम दिशा में बहने वाली नदी भी कहा जाता है.

कुछ स्थानों पर उत्तर की ओर भी मुड़ती है धारा

नर्मदा का एक और रोचक पहलू यह है कि कुछ स्थानों पर इसकी धारा उत्तर दिशा की ओर भी बहती दिखाई देती है. इसे ‘उत्तरवाहिनी नर्मदा’ कहा जाता है. धार्मिक दृष्टि से यह बेहद शुभ माना जाता है और इन स्थानों पर विशेष धार्मिक यात्राएं और पूजा-अर्चना की जाती है.

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दुनिया में इकलौती नदी जिसकी होती है परिक्रमा

नर्मदा को दुनिया की एकमात्र ऐसी नदी माना जाता है जिसकी परिक्रमा की जाती है. आमतौर पर लोग मंदिरों या देवी-देवताओं की परिक्रमा करते हैं, लेकिन नर्मदा के प्रति आस्था इतनी गहरी है कि श्रद्धालु पूरी नदी के किनारे-किनारे हजारों किलोमीटर की यात्रा कर उसकी परिक्रमा करते हैं. परिक्रमा की शुरुआत करते समय भक्त नर्मदा को अपनी दाहिनी ओर रखते हुए यात्रा शुरू करते हैं.

परिक्रमा से मिलता है आध्यात्मिक ज्ञान

भोपाल के ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद पचौरी के अनुसार, पुराणों में नर्मदा परिक्रमा का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में एक बार भी नर्मदा परिक्रमा कर लेता है, उसे आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है और उसके पाप नष्ट हो जाते हैं. कई श्रद्धालु बताते हैं कि यह यात्रा केवल धार्मिक नहीं बल्कि आत्मिक अनुभव भी होती है.

जीवन बदलने वाली मानी जाती है यात्रा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नर्मदा परिक्रमा का पुण्य कई तीर्थ यात्राओं से भी अधिक माना गया है. यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा के लिए निकलते हैं. कुछ लोग किसी शुभ मुहूर्त या विशेष तिथि पर यात्रा शुरू करते हैं, जबकि कई लोग वर्ष में कभी भी नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत कर देते हैं. माना जाता है कि मां नर्मदा की यह यात्रा व्यक्ति के जीवन को नई दिशा दे सकती है और उसे आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है.

Ranjana Sharma
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