LPG vs LNG vs PNG vs CNG: भारत के बड़े शहरों में गैस की मांग और आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. दुनिया भर की सप्लाई चेन में बाधाएं भारतीय शहरों तक ईंधन की उपलब्धता को प्रभावित कर रही हैं. खासकर हाल के समय में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य पूर्व से गैस आपूर्ति में रुकावट के डर को और बढ़ा दिया है.
मिसाइल हमलों और पाइपलाइनों पर खतरे के बीच हॉर्मुज जलसंधि एक संवेदनशील क्षेत्र बन गया है. यहां से दुनिया की लगभग 20% गैस सप्लाई गुजरती है. अगर इस मार्ग में लंबे समय तक बाधा आती है, तो भारत जैसे देशों के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जो अपनी गैस का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करते हैं.
भारतीय शहरों में प्रभाव
अहम रिपोर्ट्स बताती हैं कि चेन्नई, मुंबई और बैंगलुरु जैसे शहरों में गैस की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है. रेस्टोरेंट्स वाले से पहले ही गैस की कमी को लेकर सतर्क हो चुके हैं.
इस स्थिति ने एक जरूरी सवाल उठाया है: घर, वाहन और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न गैसों के स्रोत कौन-कौन से हैं और वे भारत की ऊर्जा सुरक्षा में क्यों अहम हैं?
LPG: रसोई का भरोसेमंद साथी
ज्यादातर भारतीय परिवारों को रसोई गैस के लाल सिलेंडर से परिचित हैं. LPG यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस का इस्तेमाल मेन रूप से खाना पकाने के लिए होता है. ये गैस कच्चे तेल और नेचुरल गैस के प्रसंस्करण से निकलती है और सिलेंडरों में भरी जाती है.
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी सरकारी योजनाओं ने LPG को गरीब और मध्यम वर्ग के घरों तक पहुंचाया. आज भी, जहां पाइपलाइन नहीं पहुंची है, वहां LPG ही मेन खाना पकाने वाला ईंधन है. इसका फायदा इसकी पोर्टेबिलिटी है सिलेंडर कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है.
CNG: वाहनों के लिए स्वच्छ ईंधन
जहां रसोई में LPG का बोलबाला है, वहीं शहर की सड़कों पर CNG यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस देखी जा सकती है. ये उच्च दबाव पर संपीड़ित नेचुरल गैस होती है, जिसे वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.
दिल्ली जैसे शहरों ने 2000 के दशक में बसों और ऑटो-रिक्शाओं में CNG का उपयोग शुरू किया ताकि वायु प्रदूषण कम हो. पेट्रोल और डीजल की तुलना में CNG साफ-सुथरी जलती है और कम धुआं छोड़ती है.
PNG: पाइपलाइन के जरिए घर तक गैस
अगर परिवार सिलेंडर का झंझट नहीं चाहते तो PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस एक आसान ऑप्शन है. ये गैस सीधे पाइपलाइन के जरिए घरों, रेस्टोरेंट्स और उद्योगों तक पहुंचती है. ये प्रक्रिया पानी की कनेक्शन जैसी होती है गैस पाइप में बहती है और मीटर के हिसाब से बिल आता है. शहरों में PNG नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है, जिससे लोग बिना सिलेंडर के खाना पका सकते हैं.
LNG: लंबी दूरी की यात्रा करने वाला ईंधन
LPG, CNG और PNG सीधे उपभोक्ता तक पहुंचते हैं, लेकिन LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस एक अलग भूमिका निभाती है. इसे –162°C तक ठंडा करके तरल रूप में बदल दिया जाता है, जिससे इसका परिवहन लंबी दूरी तक आसान हो जाता है. भारत कई देशों से LNG आयात करता है, जिसे पेट्रोनेट LNG जैसी कंपनियों के टर्मिनल पर रिसीव किया जाता है. फिर इसे सामान्य प्राकृतिक गैस में बदलकर उद्योगों, पावर प्लांट और शहरों के गैस नेटवर्क तक पहुंचाया जाता है. साधारण भाषा में कहें तो, LNG आम घरों में सीधे इस्तेमाल नहीं होती. ये पूरे गैस आपूर्ति तंत्र को ऊर्जा देती है.
चार गैसें, भारत की ऊर्जा प्रणाली
इन चार प्रकार की गैसें LPG, CNG, PNG और LNG भारत की बढ़ती गैस अर्थव्यवस्था के मूल स्तंभ हैं. उपभोक्ता के लिए फर्क सिर्फ इतना है कि गैस सिलेंडर, पाइपलाइन, वाहन टैंक या जहाज के जरिए आती है. लेकिन भारत के ऊर्जा ढांचे के लिए ये चारों ईंधन बेहद महत्वपूर्ण हैं.

