Categories: देश

क्या आप जानते हैं कि समुद्र के रास्ते भारत तक गैस कैसे पहुंचती है?

इन दिनों ईरान और इजराइल में जो वॉर चल रहा है उसके चलते भारत में गैस को लेकर लोग काफी चिंतित दिखाई दे रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये गैस समुद्र के रास्ते भारत कैसे आती है. आइए जानते हैं यहां-

Published by sanskritij jaipuria

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है. कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं. नोएडा सहित कई जगहों पर लोगों ने गैस की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किए हैं. हालात ऐसे हैं कि बुकिंग करने के बाद भी कई लोगों को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. कुछ जगहों पर नाराज लोगों ने सड़क जाम कर अपना गुस्सा भी जताया है.

दरअसल भारत अपनी जरूरत की पूरी रसोई गैस खुद नहीं बनाता. देश में लगभग 40 प्रतिशत गैस का उत्पादन होता है, जबकि करीब 60 प्रतिशत गैस विदेशों से मंगाई जाती है. इसी वजह से जब अंतरराष्ट्रीय रास्तों या सप्लाई पर असर पड़ता है, तो उसका प्रभाव भारत में भी महसूस होने लगता है.

किन देशों से आती है भारत में एलपीजी?

भारत लंबे समय से रसोई गैस के लिए पश्चिम एशिया के देशों पर निर्भर रहा है. कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे देश भारत को बड़ी मात्रा में एलपीजी भेजते हैं. इन देशों से भारत की दूरी हजारों किलोमीटर है.

भारत में आने वाली ज्यादातर गैस समुद्र के रास्ते आती है. इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से होकर गुजरता है और फिर समुद्री मार्ग से भारत तक पहुंचता है. यही वजह है कि इस समुद्री रास्ते को ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है.

Related Post

समुद्र के रास्ते भारत तक कैसे पहुंचती है गैस?

रसोई में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी उसी रूप में ट्रांसपोर्ट नहीं की जाती. एलपीजी दरअसल ब्यूटेन और प्रोपेन गैसों का मिश्रण होती है. इसे लंबी दूरी तक ले जाने के लिए पहले तरल यानी लिक्विड रूप में बदला जाता है.

गैस को दबाव में रखकर और तापमान करके लिक्विड में बदला जाता है. ऐसा करने से ये कम जगह घेरती है और जहाजों में ज्यादा मात्रा में गैस एक साथ ले जाई जा सकती है. इसके लिए खास तरह के बड़े गैस कैरियर जहाज इस्तेमाल किए जाते हैं.

भारत पहुंचने के बाद क्या होता है?

समुद्र के रास्ते आने वाली एलपीजी भारत के कई बड़े बंदरगाहों पर उतारी जाती है. इनमें गुजरात का दहेज, कर्नाटक का मंगलूर और आंध्र प्रदेश का विशाखापत्तनम प्रमुख हैं. यहां गैस को बड़े स्टोरेज टैंकों में रखा जाता है. इसके बाद पाइपलाइन, टैंकर ट्रक या रेल टैंकर के जरिए इसे बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचाया जाता है. बॉटलिंग प्लांट में गैस को सिलेंडरों में भरा जाता है और फिर इन्हें गैस एजेंसियों के माध्यम से घर-घर पहुंचाया जाता है.

 

sanskritij jaipuria
Published by sanskritij jaipuria

Recent Posts

‘हिंदू मुसलमानों से बेहतर’, बप्पा के सामने सिर झुकाती है ये मुस्लिम हसीना; दूसरे धर्म में कर चुकी हैं शादी

Mumtaz On Interfaith Marriage: एक्ट्रेस मुमताज ने इंटरफेथ मैरिज, पॉलिगैमी और आध्यात्मिक मान्यताओं पर खुलकर…

March 13, 2026

Aadhaar Address Update Online: फ्री में बदले आधार पर नया एड्रेस, नोट करें प्रोसेस, डॉक्यमेंट्स समेत हर डिटेल

Aadhaar Address Update Online: देश के निवासी UIDAI के myAadhaar पोर्टल के ज़रिए अपना आधार…

March 13, 2026

NXT Summit 2026: डॉ. ऐश्वर्या पंडित शर्मा ने कैंसर को लेकर किया आगाह, खतरनाक बीमारी को लेकर दिए अहम सुझाव

NXT Summit 2026: दुनिया का सबसे बड़ा ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग मिशन है. ये पहल कैंसर…

March 13, 2026

महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्ती! अब लव जिहाद पर लगेगी लगाम; कड़े नियम लाने की तैयारी में सरकार

Maharashtra Freedom of Religion Bill 2026: महाराष्ट्र विधानसभा में पेश धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 धर्म…

March 13, 2026

Chaitra Navratri 2026: इस नवरात्र नहीं होंगे मांगलिक कार्य, गृहप्रवेश की हसरत भी रहेगी अधूरी… जानिए क्या है वजह

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाई जाएगी.…

March 13, 2026