Home > देश > Bengal Election: चुनाव रिजल्ट के बाद भी तैनात रहेगी फोर्स, बंगाल में हिंसा रोकने के लिए EC का बड़ा फैसला; सुरक्षा की कड़ी निगरानी

Bengal Election: चुनाव रिजल्ट के बाद भी तैनात रहेगी फोर्स, बंगाल में हिंसा रोकने के लिए EC का बड़ा फैसला; सुरक्षा की कड़ी निगरानी

Election Commission: बंगाल में रिजल्ट आने के बाद भी अगले आदेश तक सेंट्रल ऑर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) की 500 कंपनियां बंगाल में तैनात रहेंगी. चुनाव आयोग ने यह फैसला बंगाल में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया है.

By: Preeti Rajput | Published: April 3, 2026 2:57:51 PM IST



West Bengal Assembly Election 2026 : पश्चिम बंगाल में चुनाव के नतीजों के बाद होने वाली हिंसा पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है. चुनाव आयोग ने शुक्रवार को कहा कि ‘मतों की गिनती पूरी होने के बाद अगले आदेश तक ऑर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) की 500 कंपनियां बंगाल में तैनात रहेंगे. इस दौरान वह राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखेंगे. इसके अलावा ईवीएम एवं स्ट्रांग रूम की सुरक्षा में 200 कंपनियों को तैनात किया जाएगा. मतदान केंद्र की सुरक्षा पर भी नजर रखी जाएगी. 

ईवीएम/स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा 

चुनाव आयोग ने कहा कि ‘सीएपीएफ की 500 कंपनियां पश्चिम बंगाल में मतगणना पूरी होने के बाद भी अगले आदेश तक राज्य में तैनात रहेंगी. इसके अलावा 200 कंपनियां ईवीएम/स्ट्रॉन्ग रूम और मतगणना केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखेगी.’ 

52 लाख मामलों का निपटारा

निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में पुनरीक्षण कवायद के तहत गुरुवार को आठवीं पूरक सूची प्रकाशित की. साथ ही कहा कि उसने 52 लाख मामलों का निपटारा कर दिया है. आयोग ने उम्मीद जताई है कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक, अगले चार दिनों के भीतर इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा. इस अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्य निवार्चन अधिकारी के कार्यालय ने अब तक मतदाता सूची से लगभग 35 से 40 प्रतिशत नामों को हटा दिया है. 

60 लाख से अधिक नामों की हुई जांच 

उन्होंने कहा कि ‘गुरुवार की शाम तक लगभग 52 लाख मामलों का सत्यापन और निपटारा किया जा चुका है. बाकी बचे हुए लगभग आठ लाख आवेदकों के लिए काम जारी है. अगले चार दिन के भीतर वह भी पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है. अधिकारियों ने कहा कि संपूर्ण निर्णय प्रक्रिया सात अप्रैल तक पूरी कर दी जाएगी. अंतिम मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद 60 लाख से अधिक नामों की जांच की जा रही थी. जिन लोगों के नाम पूरक सूची में शामिल नहीं है. उन्हें अब समाधान के लिए न्यायाधिकरणों का रुख करना होगा.’

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