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“भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से कांपा बांग्लादेश, कांपते हुए इस देश से मदद मांग रहे Yunus…पड़ोसी को पाकिस्तान जैसे हाल का सता रहा है डर भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से कांपा बांग्लादेश, कांपते हुए इस देश से

Bangladesh Defense Deal : भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आने वाले समय में अरबों रुपये की डील को अंजाम दे सकता है। इस कड़ी में बांग्लादेश हवाई सुरक्षा सिस्टम को मजबूत करने के लिए लंदन में एक सैन्य दल भेजा है।

Published by Jaydeep Chikhaliya

Bangladesh Defense Deal : भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आने वाले समय में अरबों रुपये की डील को अंजाम दे सकता है। इस कड़ी में बांग्लादेश ने अपने हवाई सुरक्षा सिस्टम को मजबूत करने के लिए लंदन में एक सैन्य दल भेजा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ये सैन्य दल एयर डिफेंस सिस्टम के बारे में जानकारी लेगा। बांग्लादेश का यह कदम भारत द्वारा पाकिस्तान पर चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद आया है। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम भारतीय मिसाइलों को रोकने में विफल रहा था। इससे पता चला कि पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम कमज़ोर है। अब बांग्लादेश अपनी हवाई सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गया है। वह दूसरे देशों से हाथ मिलाकर अपनी सुरक्षा को मज़बूत करना चाहता है।

यूके पहुंचा उच्च-स्तरीय सैन्य दल

बांग्लादेश से एक उच्चस्तरीय सैन्य प्रतिनिधिमंडल 23 से 26 जून तक लंदन में आयोजित हो रहे 19वें फुल स्पेक्ट्रम एयर डिफेंस समिट में भाग लेने गया है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मेजर जनरल मोहम्मद कमरुल हसन कर रहे हैं। वो रंगपुर क्षेत्र के कमांडर और 66 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में बांग्लादेश की सेना और वायुसेना के छह वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। इस समिट में बांग्लादेश की मौजूदगी से पता चलता है कि वह अपनी सैन्य साझेदारी को बढ़ाना चाहता है। लंदन में आयोजित हो रहे इस समिट में एकीकृत वायु और मिसाइल रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसमें भाग लेने वाले देशों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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स्काई सेबर सिस्टम पर बन सकती है बात

बांग्लादेश को ब्रिटेन का स्काई सेबर सिस्टम पसंद आ सकता है। स्काई सेबर ब्रिटेन का मध्यम दूरी का ग्राउंड-बेस्ड मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है। इसे 2021 में कमीशन किया गया था और इसकी लागत करीब 900 मिलियन डॉलर (करीब 7700 करोड़ रुपये) है। यह सिस्टम लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोन और मिसाइलों से होने वाले खतरों से निपटने के लिए बनाया गया है। नाटो के पूर्वी हिस्से की सुरक्षा के लिए इस सिस्टम को फ़ॉकलैंड द्वीप और पोलैंड में भी तैनात किया गया है।

Jaydeep Chikhaliya
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