Somvati Amavasya 2026: कब है सोमवती अमावस्या? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि से जुड़ी पूरी जानकारी

Somvati Amavasya 2026 Date : सोमवती अमावस्या का व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं. इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है. माना जाता है कि, इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से पितृ दोष से राहत मिल जाती है. आइए जानते है सोमवती अमावस्या की सही तारीख...

Published by Preeti Rajput
Somvati Amavasya 2026 Kab Hai : अमावस्या का हिंदू धर्म में खास महत्व है. वहीं इस बार अमावस्या सोमवार को पड़ने वाली है, जिसे सोमवती अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. शास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस्या पर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा का काफी ज्यादा महत्व होता है. इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. इस दिन महिलाओं को पूरे विधि-विधान के साथ पूजा करनी होती है और पीपल के पेड़ की परिक्रमा भी करनी होती है. सोमवती अमावस्या पर स्नान और दान करने से  पितृ दोष से भी राहत मिल सकती है.

कब है सोमवती अमावस्या?

पंचांग के मुताबिक, अमावस्या तिथि 16 फरवरी सोमवार के दिन शाम को 5 बजकर 35 मिनट से शुरु होने जा रही है. वहीं अगले दिन 17 फरवरी की शाम को 5 बजकर 31 मिनट तक अमावस्या रहने वाली है. क्योंकि 16 तारीख सोमवार को सूर्यास्त से पहले अमावस्या तिथि लग रही है. ऐसे में सोमवती अमावस्या का व्रत इस दिन मान्य होगा. वहीं अगले दिन मंगलवार को भी अमावस्या तिथि रहने के चलते इस दिन भौमवती अमावस्या का संयोग बनेगा. शास्त्रों के मुताबिक, अगर सूर्यास्त से पूर्व एक घड़ी भी सोमवार को हो तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाएगा. इसी कारण अमावस्या का व्रत सोमवार को रखा जाएगा.

सोमवती अमावस्या का शुभ मुहूर्त

सोमवती अमावस्या का व्रत 16 फरवरी सोमवार को रखा जाएगा. वहीं अमावस्या पर स्नान दान का शुभ मुहूर्त अगले दिन 17 फरवरी मंगलवार को सुबह तक रहेगा. इसके साथ ही 17 तारीख को पितरों को प्रसन्न करने के लिए  पितृ दोष से जुड़े उपाय दोपहर के समय किए जा सकते हैं. सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान करने का काफी महत्व होता है. इसके साथ ही जातक को पूण्य की प्राप्ति होती है.

यहां जानें पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
  • भगवान शिव और माता पार्वती के मंदिर पूजा करनी चाहिए.
  • शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा पर 7 या 11 बार कच्चा सूत लपेटें.
  • साफ वस्त्र धारण करके पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए.
  • लकड़ी की चौकी पर वस्त्र बिछाकर शिवजी और मां पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें.
  • माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा.
  • पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए.
  • परिक्रमा करने का साथ-साथ 108 बार धागा लपेटें.
  • वृक्ष में शिवजी की वास मानकर दूध, जल, चंदन, अक्षत अर्पण करें.

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