LPG Invention: एक हादसे से कैसे बनी रसोई गैस? जानिए LPG के अविष्कार की चौंकाने वाली कहानी
LPG Invention: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष के बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं. कई जगहों पर एलपीजी की कमी और गैस सिलेंडर बुकिंग सिस्टम में बदलाव की खबरों ने एलपीजी के बारे में जानने की लोगों में जिज्ञासा और भी ज्यादा बढ़ गई है. आइए जानते हैं एसपीजी की खोज कैसी हुई थी?
पेट्रोल भाप बनकर उड़ा
1900 के दशक के शुरु में पेट्रोल का भंडारण ईंधन विक्रेताओं और उपभोक्ताओं के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती था. फिर वह भंडारण या परिवहन के दौरान पेट्रोल तेजी से भाप बनकर उड़ जाता था. जिसके कारण ईंधन का काफी नुकसान हो रहा था. सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी पैदा हो सकते थे.
कंटेनरों के भीतर गैस
पेट्रोल के कंटेनरों के भीतर गैस बन जाती थी. जिसके कारण तरल ईंधन की मात्रा कम बचती थी. विस्फोट की संभावना भी काफी बढ़ जाती थी. इसी परेशानी ने वैज्ञानिकों को जांच करने के लिए प्रेरित किया कि पेट्रोल के साथ यह क्यों हो रहा है?
किसने की LPG की खोज?
एलपीजी की खोज वाल्टर स्नेलिंग ने की थी. उन्होंने साल 1910 में वाष्पीकरण की समस्या के बारे में जांच करना शुरु कर दिया. उनकी जांच तब शुरु हुई जब एक ग्राहक ने शिकायत की कि जब वह घर पहुंचा तब तक उसके द्वारा खरीदा गया आधे से अधिक पेट्रोल गायब हो गया था. स्नेलिंग ने इस घटना के पीछे की वजह के बारे में जानने के लिए पेट्रोल के रासायनिक व्यवहार का अध्ययन करने के बारे में विचार किया.
पेट्रोल की जांच हुई
अलग-अलग तापमान पर पेट्रोल के साथ प्रयोग में उन्होंने पाया कि पेट्रोल के भीतर प्रोपेन और ब्यूटेन की गैस होती हैं. सामान्य तापमान पर यह गैस तरल पेट्रोल से अलग होने के बाद हवा में मिल जाती थीं. यही कारण है कि पेट्रोल तेजी से भाप बनकर उड़ जाता था. इन गैसों को बेकार समझकर फेंक देने के बजाएं उन्होंने इकट्ठा करके एक अलग ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने के बारे में विचार किया.
पेट्रोल से गैस की खोज
इसके बाद स्नेलिंग ने प्रयोगशाला उपकरणों का इस्तेमाल कर पेट्रोल से इन गैस को अलग करने का शोध किया. इसमें एक कांच की बोतल और घर में इस्तेमाल होने वाला नल भी शामिल था. प्रोपेन और ब्यूटेन को अलग करके उन्हें कंप्रेस करके वह उन्हें तरल रुप में बदलने में सफल हो सकते हैं. इसे ही आज हम लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस करते हैं.
गैस की विशेषताएं
जब स्नेलिंग ने इन गैस को सफलतापूर्वक लिक्विड में बदल दिया, तब उन्हें एहसास हुआ कि यह गैस काफी अच्छे से जलती हैं. इनका इस्तेमाल खाना पकाने, हीटिंग और रोशनी के लिए किया जा सकता है.
1912 से हुआ इस्तेमाल
एलपीजी का सबसे पहले इस्तेमाल 1912 में घरेलू ईंधन के तौर पर हुआ. अपनी खोज के जरुरत को समझते हुए स्नेलिंग ने 1913 में एलपीजी प्रक्रिया को पेटेंट करवा लिया. वक्त के साथ एलपीजी की इस्तेमाल दुनिया के हर कोनों में होने लगा.