Bizzare Indian Tradition: आखिर क्यों हजारों ट्रांसजेंडर महिलाएं करती हैं भगवान अरावन से शादी और फिर अगले दिन ही विलाप?
Transgender marriage tradition: सजेंडर लोग समाज का एक अनोखा हिस्सा हैं, और उनके बारे में जानना हमेशा दिलचस्प होता है. वे न तो पूरी तरह पुरुष होते हैं और न ही पूरी तरह महिला. वे हमारे त्योहारों में मौजूद होते हैं, और ऐसा माना जाता है कि उनका आशीर्वाद बहुत शक्तिशाली होता है, इसलिए उनकी नकारात्मकता या श्राप से बचना चाहिए. हालांकि, उनका जीवन और रीति-रिवाज आम लोगों से काफी अलग होते हैं, यही वजह है कि उनके बारे में आम लोगों को बहुत कम जानकारी होती है. आज हम ट्रांसजेंडर लोगों की दुनिया के बारे में कुछ हैरान करने वाले तथ्य जानेंगे.
1. ट्रांसजेंडर बच्चों का रहस्य
पुरुष से बेटा और महिला से बेटी पैदा होती है, लेकिन अगर वीर्य और अंडाणु का संतुलन बराबर हो, तो ट्रांसजेंडर बच्चा पैदा होता है. समाज में इस बारे में अलग-अलग मान्यताएं रही हैं.
2. नए ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का स्वागत
जब कोई नया व्यक्ति ट्रांसजेंडर समुदाय में शामिल होता है, तो पहले से ही एक सामूहिक दावत और नाच-गाना होता है. कई रस्में भी निभाई जाती हैं; यह स्वागत समारोह उनके समुदाय में प्रवेश करने का एक अनोखा तरीका है.
3. भगवान अरावन से शादी
तमिलनाडु में एक ख़ास त्योहार मनाया जाता है इस 18-दिवसीय उत्सव में ट्रांसजेंडर महिलाएं (अरवानी) भगवान कूथंडावर (अरवन) को अपना पति मानकर उनसे विवाह करती हैं. मंदिर का पुजारी उन्हें 'थाली' (मंगलसूत्र) पहनाता है और वे दुल्हन की तरह सजती हैं. यह रस्म महाभारत की उस कथा पर आधारित है जहाँ भगवान कृष्ण ने मोहिनी रूप धरकर अरवन से विवाह किया था.
4. शोक की परंपरा (वैधव्य का पालन)
विवाह के अगले दिन, भगवान अरवन के बलिदान का प्रतीक माना जाता है. उनकी मृत्यु के बाद, अरवानी महिलाएं एक विधवा की तरह शोक मनाती हैं. वे अपनी चूड़ियाँ तोड़ती हैं, मंगलसूत्र उतारती हैं और सफेद वस्त्र धारण कर विलाप करती हैं. यह परंपरा अरवन के बलिदान और मोहिनी के रूप में कृष्ण के दुख को जीवंत करती है.
5. शिखंडी की कहानी
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, महाभारत के शिखंडी को भी एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति माना जाता था. यही वजह है कि अर्जुन ने युद्ध में भीष्म को हराया था. यह कहानी दिखाती है कि ट्रांसजेंडर लोगों का इतिहास और महत्व प्राचीन काल से ही रहा है.
6. अर्जुन और बृहन्नला
महाभारत में, जब पांडवों को जंगल में एक साल का वनवास बिताना पड़ा, तो अर्जुन बृहन्नला के रूप में रहे। यह कहानी दिखाती है कि ट्रांसजेंडर लोगों की भूमिका न केवल समाज में बल्कि इतिहास और महाकाव्यों में भी महत्वपूर्ण रही है.
7. उत्पत्ति के बारे में मान्यताएं
एक मान्यता के अनुसार, किन्नरों की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा की छाया से हुई थी. एक और मान्यता के अनुसार, उनकी उत्पत्ति अरिष्ट और ऋषि कश्यप से हुई थी. ये कहानियाँ उनके जीवन के रहस्य और गहराई का अंदाज़ा देती हैं.
8. आशीर्वाद का महत्व
कहा जाता है कि किन्नरों का आशीर्वाद बहुत शक्तिशाली होता है. इसलिए, शादी, जन्मदिन या नए घर के उद्घाटन जैसे शुभ अवसरों पर किन्नरों को बुलाना शुभ माना जाता है. उनकी उपस्थिति लोगों के लिए सौभाग्य और खुशी का प्रतीक मानी जाती है.