न गोली, न बम…व्हिस्की से 38 साल तक भिड़े दो देश, दुनिया की सबसे अजीब जंग
Whiskey War: आज के दौर में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की खबरें सुर्खियों में बनी हुई है. इस बीच इतिहास की कई जंग निकलकर सामने आती है, जिनके बारे में जानकर उनपर यकीन कर पाना मुश्किल हो जाता है. बिना गोला-बारूद और सिपाई की जान लिए एक जंग पूरे 38 सालों तक चली थी. इस युद्ध में हथियारों की जगह व्हिस्की की बोलतें थीं. हंस आइलैंड के नाम पर कनाडा और डेनमार्क ने जिस तरह से अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, वह दुनिया की सबसे मजेदार कहानियों में से एक है.
हंस आइलैंड
कनाडा और ग्रीनलैंड के बीच एक बर्फीले पानी में छोटा सा द्वीप मौजूद है. जिसे हंस आइलैंड के नाम से जाना जाता है. इस पत्थर के टुकड़े का महत्व इसलिए बढ़ गया क्योंकि यह कनाडा के एल्समियर आइलैंड और डेनमार्क के अधीन ग्रीनलैंड से केवल 18 किलोमीटर दूरी पर है.
कनाडा और डेनमार्क के बीच औपचारिक संधि
अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, दोनों देशों के पास इस पर दावा करने का कानूनी आधार मौजूद था. इसी कारण दोनों देशों के बीच काफी लंबे समय तक क्षेत्रीय विवाद देखने को मिला. शुरुआत में इस द्वीप को लेकर खींचतान देखने को मिली. वहीं 1973 में कनाडा और डेनमार्क के बीच एक औपचारिक संधि हुई.
क्या थी ये औपचारिक संधि?
इस संधि के तहत द्वीप के दोनों किनारों से समुद्री रेखाएं शुरू होंगी, लेकिन हंस आइलैंड पर किसका अधिकार होगा, यह फैसला साफ नहीं हो सका. दोनों देशों ने इसे भविष्य पर टाल दिया. दोनों के बीच सहमति बनी की फिलहाल इस पर किसी का हक नहीं होगा.
1984 से हुई जंग की शुरुआत
इस जंग की औपचारिक शुरुआत 1984 से हुई. कनाड़ा के सैनिकों ने हंस आइलैंड का दौरा किया. साथ ही वहां अपना राष्ट्रिय ध्वज भी फहरा दिया. लेकिन उन्होंने वहां केवल झंडा ही नहीं बल्कि एक कनाडाई व्हिस्की की बोतल भी रख दी. यह एक तरह का संदेश था कि यह इलाका अब कनाडा का है.
व्हिस्की वॉर का आरंभ
इसके बाद डेनमार्क के ग्रीनलैंड अफेयर्स मंत्री खुद उस टापू पर पहुंचे. उन्होंने वहां पर कनाडा का झंडा हटाकर डेनमार्क का लगा दी. साथ ही वहां 'डैनिश श्नॉप्स' (डेनमार्क की मशहूर शराब) की एक बोतल रख दी. जिसके साथ एक पर्ची भी छोड़ी गई, उस पर लिखा था कि डेनमार्क के द्वीप में आपका स्वागत है. यह सिलसिला इसी तरह सालों तक चलता रहा.
'व्हिस्की वॉर' के नाम से मशहूर हुई जंग
दुनिया के इतिहास में शायद ही कोई ऐसी जंग होगी, जो इतने सालों तक चलती रही हो. जिसमें बिना बमबारी और गोली के लड़ाई हो रही है. कनाडा और डेनमार्क के सैनिक हंस आइलैंड पर जाते और झंडे के साथ शराब की बोतलें भी एक्सचेंज करते रहे.
2005 में शुरू हुआ कूटनीतिक दौर
साल 2005 तक दोनों देशों को लगने लगा कि इस द्वीप के मुद्दे को हमेशा के लिए सुलझा लेना चाहिए. दोनों ही देश नाटो (NATO) के सदस्य थे. जिस कारण उनके बीच संबंध अच्छे थे. कई मुलाकातों के बाद एक ऐसा फार्मूला तैयार किया गया, जिसे दोनों पक्षों ने मंजूर किया.
38 साल बाद सुलझा मामला
जून 2022 में 38 साल पुराने युद्ध का आधिकारिक अंत हुआ. कनाडा की विदेश मंत्री मेलॉनी जॉ और डेनमार्क के विदेश मंत्री जेप्पे कोफोड ने मुलाकात की. समझौता हुआ कि हंस आइलैंड को दो बराबर हिस्सों में बांटा जाएगा. जिस पर दोनों ने सहमती जताई थी.