कमजोर नहीं… ताकतवर बनेगा बच्चा, बेटे के हारने पर Sania Mirza देती हैं ये सलाह; हर माता-पिता को सीखनी चाहिए ये बात
Sania Mirza Teaching Her Son: शुरुआत में छोटी-मोटी नाकामियों को झेलने से बच्चे बाद में बड़ी मुश्किलों, पढ़ाई में निराशा और करियर की चुनौतियों का सामना करने में काफी मदद मिलती है. सानिया मिर्जा ने भारतीय महिला टेनिस को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है. वह कभी भी आसानी से हार नहीं मानती हैं. भले ही मुकाबला उनके बेटे से हो या फिर कुछ और. फुटबॉल लेजेंड सुनील छेत्री के साथ अपने पॉडकास्ट ‘सर्विंग इट अप विद सानिया‘ में बातचीत के दौरान, इस टेनिस प्लेयर ने बताया कि खेल खेलते समय वह अपने बच्चे के साथ भी कॉम्पिटिटिव हो जाती हैं.
सानिया मिर्जा अपने बेटे को देती है सीख
सानिया मिर्जा ने बताया कि "मैं उसे जीतने नहीं देती हूं." उन्होंने आगे कहा कि "वह सच में मुझे फुटबॉल में हरा देता है, क्योंकि वह काफी अच्छा खेलता है. मेरे दोनों पैर उल्टे हैं. अगरटेनिस खिलाड़ी के लिए ऐसा होना मुमकिन है, तो मैं वैसी ही हूं."
हार की सीख जरुरी
सानिया मिर्जा ने आगे कहा कि "वह अपने बेटे के साथ पैडल से लेकर टेनिस तक कई तरह के खेल खेलती हैं. उसके हैंड-आई कोऑर्डिनेशन की तारीफ की. उन्होंने यह भी बताया कि उनका बच्चा इतना स्मार्ट है कि वह जीतने के लिए उनके साथ टीम बनाना पसंद करता है.
हार इमोशनल डेवलपमेंट के लिए जरुरी
सानिया ने छेत्री से पूछा कि क्या सानिया मिर्जा के गेम हारने पर उन्हें गुस्सा आता है, तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि "बहुत ज्यादा, वह बहुत परेशान हो जाते हैं. मुझे उन्हें शांत करना पड़ता है. उन्हें यह कहना पड़ता है कि "अगर तुम हार भी जाओ तो कोई बात नहीं है." हार को संभालना सीखना बच्चे को इमोशनल डेवलपमेंट का एक अहम हिस्सा है. एक साइकोलॉजिस्ट ने ज़िंदगी की शुरुआत में ही बच्चे को हार का सामना करने देने के महत्व पर बात की थी.
डॉ. रिम्पा सरकार ने दी जानकारी
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और सेंटियर वेलनेस की फाउंडर, डॉ. रिम्पा सरकार ने कहा कि "जब बच्चे माता-पिता के साथ खेल, गेम सुरक्षित, सपोर्टिव माहौल में हारते हैं, तो निराशा सहने की क्षमता, इमोशनल कंट्रोल और लगन से सीखने की कोशिश करते हैं. हर बार जीतने से शॉर्ट-टर्म कॉन्फिडेंस बढ़ सकता है. लेकिन यह अक्सर बच्चों को निराशा से सीखने का मौका देता है.
ग्रोथ के मेहनत जरुरी
indianexpress.com से बातचीत के दौरान "जब माता-पिता अपने बच्चे को उन एक्टिविटीज़ में जीतने नहीं देते, जिनमें वह माहिर होते हैं. तो वे हक के बजाय असलियत और मेहनत पर आधारित ग्रोथ का उदाहरण पेश कर रहे होते हैं."
प्रेरणा और आत्मविश्वास को मजबूत करना
डॉ. सरकार का मानना है कि यह तरीका तभी काम करता है जब इसमें अपमान या दबाव न हो. "माता-पिता को हार के बाद बच्चे की भावनाओं का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए, तुलना नहीं करनी चाहिए, या उन्हें नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए. साथ ही, बच्चों को उन क्षेत्रों में सच में जीतने देना भी उतना ही जरूरी है जहां वे अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं, यह काबिलियत, प्रेरणा और आत्मविश्वास को मजबूत करता है."
करियर की चुनौतियां
उन्होंने कहा "शुरुआत में छोटी-छोटी असफलताओं का अनुभव करने से बच्चों को बाद में बड़ी असफलताओं को संभालने में मदद मिलती है, चाहे वह पढ़ाई में निराशा हो, रिजेक्शन हो, या करियर की चुनौतियां. हार के बाद, बच्चों को गुस्सा, दुख या शर्मिंदगी महसूस हो सकती है. सरकार के अनुसार, माता-पिता इन भावनाओं को पहचानने, उन्हें सामान्य बनाने और सिर्फ़ नतीजे के बजाय कोशिश, सीखने और सुधार पर ध्यान केंद्रित करने में उनकी मदद करने में अहम भूमिका निभाते हैं".
हारने से नुकसान नहीं
उन्होंने कहा कि "अक्सर नुकसान हारने से नहीं, बल्कि बड़ों के उस पर रिएक्ट करने के तरीके से होता है. डॉ. सरकार ने कहा कि बच्चों को हार से ज़्यादा बचाने से वे कमज़ोर हो सकते हैं, जबकि कठोर प्रतिक्रियाओं से असफलता शर्मनाक लग सकती है. उनके अनुसार, सबसे अच्छा बैलेंस प्रोत्साहन और ईमानदारी में है. उन्होंने आखिर में कहा, "जो माता-पिता कहते हैं, 'परेशान होना ठीक है, हम इससे क्या सीख सकते हैं?' वे बच्चों में लचीलापन, आत्म-जागरूकता और भावनात्मक परिपक्वता विकसित करने में मदद करते हैं."